मुज़फ्फरनगर। जिलाधिकारी कार्यालय पर किसान मजदूर संगठन का अनिश्चितकालीन धरना आज छठे दिन भी जारी रहा। संगठन ने घोषणा की है कि आगामी 22 मई को एक बड़ी पंचायत कलेक्ट्रेट परिसर में की जाएगी, जिसमें सहारनपुर, शामली, मुज़फ्फरनगर, बिजनौर और मेरठ जिलों से संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल होंगे। इस पंचायत के बाद ही आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
धरने के दौरान किसान मजदूर संगठन और प्रशासन के बीच एक घंटे तक वार्ता चली, लेकिन वह बिना किसी नतीजे के विफल रही। संगठन का आरोप है कि प्रशासन केवल धरना समाप्त करवाने पर ज़ोर देता है, लेकिन किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान की कोई चर्चा नहीं करता।
किसान मजदूर संगठन ने आरोप लगाया है कि बिजली सुधार योजना के नाम पर सरकारी धन की लूट हो रही है। उनका कहना है कि प्राइवेट कंपनियां करोड़ों रुपये का नुकसान कर रही हैं और विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है। चकबंदी विभाग, तहसील से फर्द निकलवाने सहित तमाम जगहों पर गरीब किसान-मजदूरों को लूटा जा रहा है। संगठन के राष्ट्रीय सचिव कृष्णपाल सिंह ने कहा कि वह 15 मई से कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा,
“हम डीएम कार्यालय के सामने पड़े हैं, मच्छर भी खा रहे हैं और काम भी छूट रहा है। फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। यह आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ है।”
कृष्णपाल सिंह ने आरोप लगाया कि चाहे एलएनटी कंपनी हो या तहसीलों में फर्द निकलवाने की प्रक्रिया, हर जगह भ्रष्टाचार व्याप्त है। बिजली मीटरों में भी घोटाले की बात उन्होंने दोहराई।
उन्होंने कहा, “अधिकारियों से एक घंटे की बातचीत हुई, लेकिन वे केवल यह पूछते हैं कि धरना कब और कैसे खत्म किया जाएगा। समस्या के समाधान की बात कोई नहीं करता।”
कृष्णपाल सिंह ने साफ किया कि 22 मई को प्रस्तावित पंचायत के बाद ही भविष्य की रणनीति बनाई जाएगी। संगठन अभी पीछे हटने को तैयार नहीं है और जब तक समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, आंदोलन जारी रहेगा।











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