मुजफ्फरनगर। जिले के गुड़ की मिठास नेपाल और दुबई तक पहुंच गई है। इसकी क्वालिटी के लिए मिले GI टैग की वजह से मिले ऑर्डर के बाद, 50-50 क्विंटल गुड़ सैंपल के तौर पर भेजे गए हैं, और एक्सपोर्ट के लिए लगातार ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, एक एक्सपोर्टर के ज़रिए कनाडा से पांच टन गुड़ का ऑर्डर भी मिला है।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट स्कीम के तहत चुने गए मुजफ्फरनगर जिले के गुड़ को लगभग तीन साल पहले GI टैग मिला था। तब से, जिले में बनने वाले गुड़ की मिठास पूरे देश में फैल गई है। टैग मिलने के बाद, घरेलू और इंटरनेशनल दोनों बाजारों में लोकल गुड़ की डिमांड बढ़ गई है।
असिस्टेंट डिप्टी कमिश्नर आशीष कुमार ने बताया कि GI टैग एक तरह की मुहर होती है। टैग मिलने से प्रोडक्ट को खास अहमियत मिलती है। इससे उस इलाके को उसके प्रोडक्शन पर कलेक्टिव मोनोपॉली भी मिल जाती है।
ड्राई फ्रूट्स और अदरक-सौंफ वाले गुड़ की डिमांड: GI टैग वाली फर्म हरित ज़ोन फार्मर्स के डायरेक्टर रॉबिन बालियान ने बताया कि GI टैग पाने वाले कई गुड़ बनाने वालों को विदेश से ऑर्डर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ड्राई फ्रूट्स और अदरक-सौंफ वाले गुड़ की डिमांड खास तौर पर ज़्यादा है। उन्होंने आगे बताया कि गुरुग्राम में एक जॉइंट वेंचर एक्सपोर्टर के ज़रिए 15 टन चीनी और पांच टन गुड़ नेपाल एक्सपोर्ट किया गया है। पांच टन गुड़ दुबई भी भेजा गया है। उन्होंने बताया कि रसूलपुर जतन में बनी उनकी प्रोसेसिंग यूनिट से भी गुड़ और चीनी एक्सपोर्ट की जा रही है।











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