मुजफ्फरनगर। जिले में दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराध के एक मामले में पुलिस की सशक्त पैरवी (Operation Conviction) और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के कारण दोषी को कड़ा दंड मिला है। मुजफ्फरनगर के एडीजे/एफटीसी-02 न्यायालय ने आरोपी को 15 वर्ष के कठोर कारावास और ₹36,000 के अर्थदंड की सज़ा सुनाई है। न्यायाधीश श्रीमती नेहा गर्ग ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
मामला और पुलिस की त्वरित कार्रवाई-
यह मामला थाना पुरकाजी क्षेत्र का है। दिनांक 29 नवंबर 2015 को वादी मौ. आलम ने पुरकाजी थाने में तहरीर दी थी। शिकायत में बताया गया कि अभियुक्त वसीम पुत्र हासिम (निवासी ग्राम भूराहेड़ी, थाना पुरकाजी) ने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी कर ली थी। अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर वसीम ने अपनी पहली पत्नी की फांसी लगाकर हत्या कर दी।
इस शिकायत के आधार पर पुरकाजी पुलिस ने तत्काल मु.अ.सं. 577/2015 धारा 498ए, 323, 304बी भादवि व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए 9 दिसंबर 2015 को ही आरोपी वसीम को गिरफ्तार कर लिया।
सशक्त पैरवी और न्याय की जीत-
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन और ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत, पुलिस अधीक्षक अपराध श्रीमती इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में, पुलिस टीम ने मामले की विवेचना में कोई कसर नहीं छोड़ी। वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण साक्ष्य संकलन के बाद, 29 फरवरी 2016 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अरुण जावला और कोर्ट पैरोकार आरक्षी अंकित सागर ने कोर्ट में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा और सभी गवाहों को समय से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराया। मुजफ्फरनगर पुलिस की इस ठोस पैरवी के परिणामस्वरूप, माननीय न्यायाधीश श्रीमती नेहा गर्ग ने आरोपी वसीम पुत्र हासिम को सभी आरोपों में दोषी पाया और 15 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई।
पुलिस की इस त्वरित और न्यायपूर्ण कार्रवाई की आम जनता ने भूरी-भूरी सराहना की है। इस निर्णय से समाज में यह सख्त संदेश गया है कि दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, जिससे कानून-व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।










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