नई दिल्ली। देश के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार जल्द ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत देशभर के गन्ना किसानों को एक बड़ी सौगात देने वाली है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा करते हुए कहा कि गन्ने की समस्याओं और संभावनाओं पर शोध के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में एक समर्पित टीम बनाई जाएगी।
चौहान ने कहा कि यह टीम गन्ना उत्पादन की मौजूदा नीतियों की समीक्षा करेगी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान प्रस्तुत करेगी। उन्होंने बताया कि गन्ने की 238 वैरायटी में चीनी की मात्रा अच्छी है, लेकिन कई किस्मों में रेड रॉट (लाल सड़न) जैसी गंभीर बीमारियों की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में यह जरूरी है कि नई किस्मों को विकसित करते समय उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
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कृषि मंत्री ने मोनोक्रॉपिंग को किसानों की फसल संबंधी समस्याओं का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि मोनोक्रॉपिंग से भूमि की उर्वरता कम होती है, रोगों का खतरा बढ़ता है और नाइट्रोजन फिक्सेशन भी प्रभावित होता है। इसलिए, अब ICAR की टीम यह अध्ययन करेगी कि इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती) को कैसे व्यावहारिक रूप से अपनाया जा सकता है।
गन्ना किसानों को चीनी मिलों से समय पर भुगतान न मिलना एक पुरानी समस्या रही है। कृषि मंत्री ने स्वीकार किया कि यह समस्या व्यावहारिक है और किसानों की नाराजगी भी जायज़ है। उन्होंने कहा कि मिलों की अपनी चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान मिलना चाहिए। सरकार इस दिशा में भी ठोस व्यवस्था बनाएगी।
चौहान ने कहा कि अब समय आ गया है कि गन्ना उत्पादन में मैकेनाइजेशन यानी मशीन आधारित कृषि को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए ICAR के मैकेनाइजेशन डिवीजन को गन्ना कटाई के लिए ऐसे उपकरण विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी जिससे कम मेहनत में बेहतर उत्पादन संभव हो सके।
सरकार गन्ना उत्पादन से जुड़ी वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि गन्ने से केवल चीनी या एथेनॉल ही नहीं, बल्कि अन्य बायो प्रोडक्ट जैसे मोलासेस और प्राकृतिक खाद भी तैयार किए जा सकते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिल सके। कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए ताकि रासायनिक खादों पर निर्भरता घटे और उत्पादन लागत कम की जा सके।











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