लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अवैध धर्मांतरण के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए मुजफ्फरनगर के खालापार निवासी अबू तालिब को गिरफ्तार किया है। शनिवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बताया कि यह गिरफ्तारी ‘मिशन अस्मिता’ अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण, और विदेशी फंडिंग से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
डीजीपी ने बताया कि अबू तालिब सहित छह राज्यों—पश्चिम बंगाल, गोवा, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, और उत्तर प्रदेश—से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह सुनियोजित तरीके से युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर और लालच देकर धर्मांतरण कराने में संलिप्त था। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क को अमेरिका, कनाडा, और अन्य देशों से फंडिंग प्राप्त हो रही थी, जिसका उपयोग धर्मांतरण के लिए सुरक्षित ठिकाने, कानूनी सलाह, और अन्य सहायता प्रदान करने में किया जाता था।
मामले की शुरुआत मार्च 2025 में आगरा से हुई, जब दो बहनों (33 और 18 वर्षीय) के लापता होने की शिकायत दर्ज की गई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इन बहनों को जबरन धर्मांतरण के लिए उकसाया गया था। एक युवती ने हथियार के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा की थी, जिससे मामले की गंभीरता उजागर हुई। डीजीपी ने बताया कि इस गिरोह के तार पीएफआई, एसडीपीआई, और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
अबू तालिब पर आरोप है कि वह इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और एटीएस गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य संलिप्त लोगों तक पहुंचने के लिए गहन जांच कर रही है। डीजीपी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी।
इस कार्रवाई की सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सराहना की है, इसे प्रदेश में कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









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