मुजफ्फरनगर। ऐतिहासिक गाँव सौरम में 16 से 18 नवंबर तक आयोजित हुई सातवीं सर्वखाप सर्वजातीय पंचायत का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहाँ एक ओर इस महापंचायत में 11 सामाजिक सुधार प्रस्ताव पारित हुए, वहीं दूसरी ओर गठवाला खाप से जुड़े और भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक की एक कटाक्ष भरी ‘अंताक्षरी पोस्ट’ ने सोशल मीडिया पर बालियान और गठवाला खाप के समर्थकों के बीच नई जंग छेड़ दी है।
सौरम पंचायत: विवादों का केंद्र-
15 वर्षों बाद आयोजित इस महापंचायत में जम्मू-कश्मीर के उप-मुख्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह, सांसद, मंत्री और हजारों किसान पहुंचे थे। इसमें लिव-इन रिलेशनशिप, समलैंगिक विवाह का विरोध और दहेज प्रथा के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुए।
गठवाला का विरोध: पंचायत की घोषणा के साथ ही विवाद शुरू हो गया था। गठवाला खाप ने इसे समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश बताते हुए बहिष्कार की घोषणा की थी।
खींचतान: बहिष्कार के बावजूद, गठवाला खाप के कई समर्थक बड़ी संख्या में आयोजन में पहुँचे और सक्रिय रहे, जिससे दोनों प्रमुख खापों के समर्थकों के बीच गर्मागर्मी का माहौल पहले से ही बना हुआ था।
धर्मेन्द्र मलिक की ‘अंताक्षरी पोस्ट’ ने भड़काई आग-
पंचायत खत्म होने के बाद ठंडी पड़ चुकी चर्चा तब गरमा गई, जब भाकियू प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने अपने फेसबुक वॉल पर तीन एरियल तस्वीरें (भव्य टेंट और भारी भीड़) साझा कीं।
मलिक ने इन तस्वीरों के साथ कटाक्ष करते हुए एक कैप्शन लिखा:
“आज की अंताक्षरी इतना भव्य टेंट, वाहनों का जमावड़ा, बताओ तो जानें, इस टेंट में कितनी कुर्सी?”
यह हल्की-फुल्की दिखने वाली पोस्ट तुरंत ही खाप राजनीति के संवेदनशील माहौल में चिंगारी साबित हुई।
सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी-
मलिक की पोस्ट के बाद बालियान और गठवाला खाप के समर्थक आमने-सामने आ गए:
समर्थन: गठवाला खाप के युवाओं ने पोस्ट का समर्थन करते हुए इसे आयोजन की वास्तविकता उजागर करने वाला तथ्य बताया।
विरोध: बालियान खाप के समर्थक इसे व्यंग्य के नाम पर विवाद पैदा करने की कोशिश और खाप की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने जैसा बता रहे हैं।
बयानबाजी: पोस्ट पर कुछ ही घंटों में दर्जनों तीखी टिप्पणियां आने लगीं, जिससे सोशल मीडिया पर शब्दों की जंग चलती नजर आ रही है।
सोशल मीडिया पर बढ़ते इस तनाव ने खापों के बुजुर्गों के बीच भी चर्चाएं शुरू कर दी हैं। धर्मेन्द्र मलिक की इस पोस्ट ने खाप राजनीति की जटिलताओं को फिर सामने ला दिया है और संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस मामले पर अभी तक बालियान खाप के मुखिया नरेश टिकैत या गठवाला खाप के प्रमुख नेताओं की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।











Discussion about this post