मुजफ्फरनगर। पंजाब सरकार द्वारा आंदोलनकारी किसानों पर की गई कार्रवाई के विरोध में किसान संगठनों में रोष है। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर गिरफ्तार किसान नेताओं की रिहाई की मांग की।
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने बताया कि सरकार ने किसानों को सिंचाई के लिए दी जाने वाली 10 घंटे की बिजली आपूर्ति घटाकर 7 घंटे कर दी है, जिससे खेती-किसानी पर संकट गहरा सकता है। इस मुद्दे को लेकर किसान यूनियन ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
नवीन राठी ने कहा कि पंजाब सरकार केंद्र के साथ मिलकर किसानों की जायज मांगों को दबाने के लिए पुलिस के जरिए दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान ने नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने का अधिकार दिया है, लेकिन सरकार किसानों की आवाज कुचलने में जुटी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चंडीगढ़ में 5 मार्च से प्रस्तावित सात दिवसीय धरने को जबरन समाप्त कर पूरे प्रदेश को ‘खुली जेल’ में तब्दील कर दिया गया। 19 मार्च को केंद्र सरकार के मंत्रियों से बातचीत कर लौट रहे किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, वहीं शंभू बॉर्डर पर बुलडोजर चलाकर किसानों के धरने को जबरन हटा दिया गया।
भाकियू जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि पंजाब सरकार जल्द ही किसान नेताओं को रिहा नहीं करती तो संगठन बड़े आंदोलन की तैयारी करेगा। उन्होंने सरकार से बिजली आपूर्ति बहाल करने और किसानों की अन्य समस्याओं का समाधान करने की भी मांग की।











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