मुजफ्फरनगर। जहाँ सरकारें सड़क सुरक्षा को लेकर नए-नए अभियान चला रही हैं, वहीं मुजफ्फरनगर स्थित सहायक सम्भागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यहां वाहनों की फिटनेस जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं, जो न सिर्फ कानून की अवहेलना है, बल्कि सीधे-सीधे आम जनता की जान जोखिम में डालने जैसा अपराध है।
सूत्रों के अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए आने वाले वाहनों पर AIS 0900 मानकों के अनुरूप प्रमाणित रिफ्लेक्टिव टेप नहीं लगाए जा रहे हैं। इसकी जगह डुप्लीकेट और कम गुणवत्ता वाली टेप लगाकर वाहनों को हरी झंडी दी जा रही है। इससे न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि रात्रि में सड़क पर चलने वाले इन वाहनों की दृश्यता बेहद कम हो जाती है, जिससे हादसों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस गंभीर लापरवाही के संबंध में परिवहन विभाग को शिकायतें भेजी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक न कोई कार्रवाई हुई, न कोई जवाब मिला। यह स्थिति कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत या फिर घोर लापरवाही की ओर संकेत करती है।
जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस घोटाले पर रोक नहीं लगाई गई तो यह आने वाले समय में कई मासूम जानों के नुकसान का कारण बन सकता है।
सवाल यह उठता है कि जब सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर फिटनेस प्रमाणपत्र बांटे जा रहे हैं, तो क्या हम वास्तव में सुरक्षित सड़क परिवहन व्यवस्था की बात कर सकते हैं?
जनहित में यह मांग की जा रही है कि शासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।











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