प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर के खतौली थाना क्षेत्र की एक एफआईआर को लेकर दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए याची ममता दत्त शर्मा को बड़ी राहत दी है। अदालत ने ममता दत्त शर्मा की गिरफ्तारी पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी है। अदालत ने जांच भी 90 दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए है।
याची ममता दत्त शर्मा मेरठ के प्रसिद्ध चिकित्सक और आर्यवृत्त अस्पताल के मालिक डॉक्टर मलय शर्मा की साली है। पिछले लगभग एक महीने से यह मामला ज़िले में राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ था और इस मामले पर सभी की निगाहें लगी हुई थी। इस मामले में शिकायतकर्ता राजबीर वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी एक शिकायत में डॉक्टर मलय शर्मा और उनकी साली ममता दत्त शर्मा पर उनके स्कूल की सम्पत्ति को हड़पने की साजिश रचने और उनसे अपनी जान को खतरा भी बताया है।

खतौली के प्रतिष्ठित लाल दयाल पब्लिक स्कूल में 19 मई को उस समय सनसनी फैल गई थी, जब स्कूल के संस्थापक और क्षेत्रीय विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजबीर सिंह वर्मा उर्फ टीटू पर उनके कार्यालय में पूजा के दौरान आधा दर्जन युवकों ने जानलेवा हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल वर्मा को पुलिस ने तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचाया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल और फिर मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
दरअसल राजबीर सिंह वर्मा और स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती ममता दत्त शर्मा के बीच लंबे समय से प्रबंधन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि प्रधानाचार्या द्वारा विद्यालय में मनमानी की जा रही थी, जिसके खिलाफ राजबीर सिंह वर्मा ने 17 मई को तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान सीओ खतौली रामशीष यादव से लिखित शिकायत भी की थी।
वर्मा ने स्कूल से जुड़े सभी अभिभावकों को भी एक पत्र भेजकर उनसे आग्रह किया था कि वे स्कूल में बच्चों की फीस केवल स्कूल के खाते में ऑनलाइन जमा कराए और उसकी रसीद ले,किसी को नकद न दे क्योंकि स्कूल के कर्मचारी आशीष और शबा आदि वो फीस स्कूल में जमा नहीं कर रहे थे,जब स्कूल के खाते की जांच की गई तो यह मामला पकड़ में आया है । दोनों कर्मचारी ममता के बहुत नजदीकी बताए जाते है, जिससे इस चिट्ठी से भी ममता बिगड़ी हुई थी, इनमे आशीष, तो राजबीर सिंह पर हुए हमले के आरोपियों में भी शामिल है और सीसीटीवी में भी कैद हुआ था। ये है विवाद का कारण बना पत्र-
घटना के दिन सुबह भी वर्मा ने थाना पहुंचकर ममता शर्मा के खिलाफ विद्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज निकाल ले जाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी जिस पर कोतवाल बृजेश शर्मा ने ममता शर्मा को भी उनका पक्ष बताने के लिए थाने बुलाया था। थाने से लौटने के बाद वर्मा स्कूल के कार्यालय में स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे, उसी समय पाँच छह युवक कार्यालय में घुसे और वर्मा पर जानलेवा हमला कर दिया था । उन्हें गंभीर हालत में प्राथमिक अस्पताल लाया गया था , जहां से मेरठ रेफर किया गया और मेरठ के सुभारती अस्पताल में उनका कई दिन तक इलाज चला।
पिछले एक महीने से इस मामले में ममता दत्त शर्मा और उनके साथ नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पर सभी की निगाहें लगी हुई थी, एसएसपी संजय कुमार वर्मा भी कभी 48 घंटे, तो कभी 5 दिन में गिरफ्तारी के वायदे कर रहे थे, लेकिन एक महीने में भी पुलिस ने ममता और उनके साथियों की गिरफ्तारी का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया, जिसके पीछे ममता दत्त के संबध ही मुख्य वजह माने जा रहे थे।
मेरठ में टोल के पास स्थित आर्यवृत्त अस्पताल के मालिक और मेरठ के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर मलय शर्मा ममता के सगे जीजा है, मलय शर्मा के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अच्छे संबध है, जिसके चलते कई आईएएस, आईपीएस, पुलिस अधिकारी और राजनेता, ममता दत्त शर्मा को बचाने की लगातार पैरवी कर रहे थे।
राजबीर सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे एक पत्र में यहां तक आरोप लगाए है कि डॉक्टर मलय शर्मा, ममता शर्मा के साथ मिलकर उनके स्कूल पर कब्जे की साजिश रच रहे है। वर्मा ने डॉक्टर मलय शर्मा, ममता शर्मा समेत इनके कुछ साथियों से अपनी जान को खतरा भी बताया है।
इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ममता शर्मा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने आदेश दिया है कि जब तक संबंधित अदालत पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान नहीं ले लेती, तब तक याची को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। साथ ही, जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करें। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने ममता दत्त शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका में कहा गया था कि याची के खिलाफ थाना खतौली, जनपद मुजफ्फरनगर में 20 मई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी, जो अपराध संख्या 0195/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 191(2), 191(3), 190, 109, 351(2), 61(2), 3(5), बीएनएस 2023 के तहत दर्ज की गई है। ममता दत्त ने इस एफआईआर को रद्द किए जाने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस अधिकारी कर रहा है और फिलहाल इस मामले में गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने 2024 के एक मामले (शोभित नेहरा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) का हवाला देते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर याची पुलिस जांच में सहयोग नहीं करती है, तो राज्य सरकार या अन्य उत्तरदाता इस आदेश को वापस लेने की याचिका दाखिल कर सकते हैं। ममता शर्मा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अम्बरीश चंद्र पांडेय और राजवीर सिंह वर्मा की तरफ से ईश्वर चंद्र त्यागी ने मामले की पैरवी की।











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