रामपुर। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आजम खां को रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। भारतीय सेना पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के सात साल पुराने मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त (बरी) करार दिया है। हालांकि, अन्य मामलों में सजायाफ्ता होने के कारण वह फिलहाल अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ रामपुर जेल में ही बंद रहेंगे।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 30 जून 2017 का है, जब भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आजम खां के खिलाफ सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि सपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आजम खां ने केंद्र और प्रदेश सरकार के विरोध में सेना के जवानों पर बेहद आपत्तिजनक और विवादित बयान दिया था। पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट का फैसला-
बृहस्पतिवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में इस मामले की अंतिम सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए सबूतों का अवलोकन करने के बाद, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आजम खां को बरी करने का आदेश सुनाया।
जेल की सलाखों के पीछे ही रहेंगे आजम-
बरी होने के बावजूद आजम खां की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। वह वर्तमान में ‘दो पैन कार्ड’ मामले में मिली 7 साल की सजा रामपुर जिला जेल में काट रहे हैं। इसी मामले में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी जेल में उनके साथ बंद हैं।
मुकदमों का ‘रिपोर्ट कार्ड’-
कुल मुकदमे: आजम खां पर 84 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
फैसले: अब तक 13 मामलों में कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है।
सजा और राहत: 7 मामलों में उन्हें सजा सुनाई गई है, जबकि सेना टिप्पणी मामले सहित शेष 6 मामलों में वह बरी हो चुके हैं।
रामपुर जेल में पिता-पुत्र-
कोर्ट ने हाल ही में आजम खां के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें रामपुर जेल से कहीं और शिफ्ट न करने का निर्देश दिया था। फिलहाल वह और अब्दुल्ला आजम रामपुर जेल में ही निरुद्ध हैं।
उत्तर प्रदेश की न्यायिक प्रक्रियाओं और जेल प्रशासन से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप यूपी पुलिस और एमपी-एमएलए कोर्ट रामपुर की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।











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