तेल अवीव : ईरान ने मिसाइल अटैक कर इजरायल को मुंहतोड़ जवाब दिया है. ईरान ने 100 से अधिक बैलेस्टिक मिसाइलें दागकर तेल अवीव को धुआं-धुआं कर दिया. तेल अवीव के आसमान में ईरानी मिसाइलों की खूब आतिशबाजी हुई. 13 जून की रात को तेल अवीव में खतरनाक मंजर दिखा. आसमान से बरसतीं मिसाइलें, जान बचाते और बंकर में छिपते लोग, यह बता रहे थे कि ईरान ने इजरायल पर बड़ा अटैक किया है. सच कहिए तो ईरान ने इजरायल में कत्लेआम मचाने की ठान ली थी, मगर कयामत की रात अचानक एक देश इजरायल का संकटमोचक बन गया.
जी हां, इजराइल के ऑपरेशन राइजिंग लायन का जवाब ईरान ने 13 जून को ऑपेशन ट्रू प्रॉमिस-3 से दिया. इजरायल ने 13 जून की सुबह ईरान में तबाही मचाई. फाइटर जेट्स से बमबारी कर तेहरान में खलबली मचा दी. इजरायली अटैक में 100 से अधिक ईरानी मारे गए. ईरान के आर्मी चीफ, कमांडर से लेकर टॉप परमाणु वैज्ञानिक ढेर हो गए. नतांज से लेकर कई परमाणु साइट्स तबाह हो गए. इससे ईरान गुस्से से लाल हो गया. उसने इजरायल से बदला लेने की ठान ली.
इसके बाद 13 जून की ही रात को ईरान ने तबाही की कहानी लिखी. ईरान ने 100 से अधिक बैलेस्टिक मिसाइलों से इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर हमला किया. ऐसा लगा कि जैसे इजरायल में कयामत की रात आ गई. तेल अवीव का आसमान मिसाइलों से भर गया. आयरन डोम्स और डेविड स्लिंग भी बहुत हद तक ईरानी मिसाइलों को भेदने में नाकामयाब हो रहे थे. तेल अवील में कोहराम च गया. ईरानी मिसाइलें इजरायल में तहलका मचा रही थीं. बचाओ-बचाओ… भागो-भागो सब कर रहे थे. तभी इजरायल का दोस्त उसका संकटमोचर बनकर ईरान के भेजे काल के सामने खड़ा हो गया.
जी हां, वह अमेरिका ही था, जिसने ईरानी मिसाइलों की तबाही को रोकने में इजरायल का साथ दिया. ईरान ने जिस तरह से अटैक किया था, उसे अकेले रोक पाना इजरायल के लिए मुश्किल हो रहा था. ऐसे वक्त में अमेरिका ने उसका साथ दिया और तब जाकर तबाही टल पाई. वरना इजरायल में कत्लेआम मच जाता. वैसे भी ईरान के अटैक में अभी 1 इजरायली की मौत की खबर है और 70 से अधिक घायल हैं. माना जा रहा है कि इजरायल में भी मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की ओर से इजराइल पर जवाबी कार्रवाई में दागी गई मिसाइल को रोकने में मदद कर रही है. अमेरिका के एक टॉप ने कहा कि अमेरिका मिसाइल रोकने में सहायता करने और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करने के लिए इजराइल के करीब अपनी प्रणालियों को ले जा रहा है. अधिकारी ने यह नहीं बताया कि अमेरिका ने किस तरह से सहायता प्रदान की, लेकिन अमेरिकी वायु सेना के लड़ाकू विमानों और विध्वंसक मिसाइल रक्षा प्रणाली ने पिछले हमलों के दौरान मिसाइल को रोका है.
दरअसल, इजराइल ने शुक्रवार को ईरान के परमाणु और मिलिट्री साइट्स पर युद्धक विमानों और ड्रोन से भीषण हमले किए. मकसद ईरान की परमाणु ठिकानों को ध्वस्त करना था. इजरायल के इस हमले में ईरान के आर्मी चीफ, आईआरसीजी प्रमुख और कई परमाणु वैज्ञानिक मारे गए. इसके बाद ईरान ने शुक्रवार की रात को इजराइल की ओर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल दागीं. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरान ने देश के परमाणु और सैन्य स्थलों पर इजराइल के भीषण हमलों के जवाब में यह कदम उठाया. उसने बताया कि ईरानी सेना ने इजराइल के खिलाफ अपने अभियान को ‘सिवियर पनिशमेंट’ (गंभीर सजा) नाम दिया है.











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