उत्तर प्रदेश। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के दौरान शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में बड़ा विवाद हो गया। इस बैठक में कैसरगंज से समाजवादी पार्टी के विधायक आनंद यादव को बाहर निकालने की घटना ने जिले का सियासी पारा चढ़ा दिया है।
विधायक को क्यों निकाला गया बाहर?
जानकारी के अनुसार, विधायक आनंद यादव को जिला प्रशासन द्वारा पत्र के माध्यम से बैठक में आमंत्रित किया गया था। लेकिन जैसे ही वे बैठक में पहुंचे, उपमुख्यमंत्री ने उन्हें शामिल होने से रोक दिया। मौर्य ने उन्हें जिलाधिकारी के चैंबर में बैठने को कहा और कहा कि उन्हें ‘अलग से बात करनी है’। इस पर विधायक ने मौके पर ही अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने की कोशिश की, जिनमें जंगली जानवरों के आतंक और बच्चों की मौत जैसी गंभीर समस्याएं शामिल थीं।
विधायक का कहना है कि उपमुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनने के बाद उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और विधायक नाराज होकर बाहर आ गए।
विधायक के आरोप-
बाहर आकर मीडिया से बातचीत में विधायक आनंद यादव ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर अपमानित किया गया है। उन्होंने मौर्य को “अपराधी” करार देते हुए आरोप लगाया कि उन पर कई मुकदमे दर्ज थे जिन्हें उन्होंने स्वयं वापस कराया है।
यादव ने यह भी कहा कि उन्हें बैठक से बाहर निकालकर “गुप्त योजना” बनाई जा रही थी। उन्होंने आशंका जताई कि इस बैठक में कुछ ऐसा तय हो रहा था जिससे बहराइच का माहौल बिगड़ सकता है। नाराज विधायक ने इस पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय में सरकार और उपमुख्यमंत्री के खिलाफ याचिका दाखिल करने की घोषणा की है।
विपक्ष का हमला-
इस घटना ने जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी ने इसे लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों का अपमान करार देते हुए भाजपा सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि एक निर्वाचित विधायक को ही जनता की समस्याएं उठाने से रोका जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है।
सपा नेताओं ने कहा कि सरकार को इस घटना पर तुरंत सफाई देनी चाहिए और उपमुख्यमंत्री को विधायक से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा की सफाई-
भाजपा नेताओं ने हालांकि इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि बैठक प्रशासनिक समीक्षा के लिए थी, जिसमें केवल अधिकारियों को ही शामिल होना था। विधायक आनंद यादव को अलग से अपनी समस्याएं बताने के लिए जिलाधिकारी के चैंबर में बुलाया गया था। भाजपा नेताओं ने कहा कि विधायक ने जानबूझकर मामले को राजनीतिक रंग दिया है।
जिले में चर्चाओं का दौर-
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बहराइच जिले में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर जहां सपा समर्थक इसे लोकतंत्र का अपमान बता रहे हैं, वहीं भाजपा के समर्थक इसे ‘साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया’ कह रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने बहराइच की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।











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