शामली। उत्तर प्रदेश शासन एवं जिलाधिकारी शामली से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी मोहम्मद मुशफेकीन के निर्देशन में विशेष शक्ति मिशन अभियान के चरण 5.0 के अंतर्गत एक वृहद अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय/शामली महिला कल्याण विभाग के समग्र स्वास्थ्य केंद्र, बनत, शामली द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विस्तार से बताया गया कि घरेलू हिंसा कारित करना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए पीड़ित महिला द्वारा अधिनियम की धारा 12 के अन्तर्गत माननीय न्यायालय से अनुतोष (राहत) प्राप्त किया जा सकता है।
इसी प्रकार, दहेज एक सामाजिक हिंसा है, और दहेज की मांग करना, लेना या देना दोनों ही दण्डनीय अपराध हैं, जिसके लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के अंतर्गत 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दहेज की माँग पर 2 वर्ष तक की सजा का प्राविधान है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि विवाह के उपरांत दोनों पक्षों द्वारा दिए गए उपहारों की हस्ताक्षरित सूची अनिवार्य रूप से एक माह के भीतर जिला दहेज प्रतिषेध अधिकारी (जो जिला प्रोबेशन अधिकारी भी नामित हैं) को प्रस्तुत की जानी अनिवार्य है।
घरेलू हिंसा या दहेज संबंधी कोई भी शिकायत स्थानीय पुलिस थाना या जिला प्रोबेशन अधिकारी (जो महिला संरक्षण अधिकारी और जिला दहेज प्रतिषेध अधिकारी भी नामित हैं) को की जा सकती है। इसके अलावा, पीड़ित महिलाएँ इन टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों पर भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं:
112: आपातकालीन सहायता
181: महिला हेल्पलाइन
1090: वूमेन पावर लाइन
कार्यक्रम में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे निराश्रित महिला पेंशन, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना आदि की भी पूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों को घरेलू हिंसा रोकने तथा दहेज न देने व लेने की शपथ ग्रहण कराई गई। जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रतिभागियों द्वारा रैली निकालकर आम जनों को जागरूक भी किया गया।
इस कार्यक्रम में महिला कल्याण विभाग से वन स्टॉप सेंटर की टीम, सीडीपीओ शामली ममता खोकर, समूह की महिलाएँ, ग्राम की महिलाएँ, बालिकाएँ, बच्चे तथा अन्य व्यक्ति उपस्थित रहे।











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