मुजफ्फरनगर। विश्वकर्मा समुदाय में एक सामाजिक संगठन पर दबदबे को लेकर विवाद बढ़ गया है। समुदाय के एक सक्रिय सदस्य नरेश विश्वकर्मा की जिला प्रशासन से शिकायत के बाद अब दूसरा पक्ष भी सामने आ गया है। नरेश विश्वकर्मा पर समुदाय से मिले दान के लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है।
भाजपा नेता जगदीश पांचाल ने इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को औपचारिक शिकायत देकर नरेश विश्वकर्मा तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नरेश विश्वकर्मा स्वयं को डॉक्टर बताकर समाज के लोगों को लंबे समय से गुमराह कर रहे हैं। साथ ही, समाज के कार्यक्रमों व योजनाओं के नाम पर जमा किए गए चंदे का अब तक कोई संतोषजनक हिसाब-किताब प्रस्तुत नहीं किया गया है।
गुरुवार को शहर के एक रेस्टोरेंट में विश्वकर्मा चौक समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश पांचाल और महासचिव मुकेश धीमान ने अन्य पदाधिकारियों और समाज के जिम्मेदार लोगों के साथ पत्रकारों से वार्ता की।
जगदीश पांचाल और मुकेश धीमान ने बताया कि नरेश विश्वकर्मा ने हाल ही में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर ट्रस्ट के गठन और पदाधिकारियों पर भ्रामक एवं साक्ष्यहीन आरोप लगाए हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वकर्मा चौक ट्रस्ट समिति, विश्वकर्मा चौक भोपा रोड, भारतीय ट्रस्ट एक्ट 1882 के अन्तर्गत 2 जुलाई 2024 को उप रजिस्ट्रार प्रथम मुजफ्फरनगर के समक्ष विधिवत रूप से पंजीकृत संस्था है।
जनरल सेक्रेटरी मुकेश धीमान ने बताया कि इससे करीब 10-12 साल पहले एक अनरजिस्टर्ड संस्था, विश्वकर्मा चौक कमेटी थी। नरेश विश्वकर्मा (जो खुद को डॉक्टर लिखते, बताते और प्रमोट करते हैं) इसके प्रेसिडेंट थे, और जगदीश पांचाल इसके जनरल सेक्रेटरी थे। 26 मई, 2024 को इस अनरजिस्टर्ड कमेटी के सभी मेंबर्स ने सोसायटी की एक जनरल मीटिंग की। अनरजिस्टर्ड कमेटी को विश्वकर्मा चौक कमेटी ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर करने का एकमत से प्रस्ताव पास किया गया। खास बात यह है कि नरेश ने ही जगदीश पांचाल को ट्रस्ट का प्रेसिडेंट चुनने का प्रस्ताव रखा था, जिसे सभी ने मान लिया।
ट्रस्ट का पंजीकरण होने पर पुरानी समिति खुद ही भंग हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद भी नरेश विश्वकर्मा ने खुद को स्वयंभू अध्यक्ष प्रचारित करते हुए समिति को अवैध रूप से खड़ा रखा।
आरोप है कि करीब 7-8 साल तक एकत्र किए गए सामाजिक चंदे का कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया। आरोप है कि साल में समिति को एक से दो लाख रुपये का चंदा मिलता रहा, और जब भी हिसाब मांगा गया तो आनाकानी की गई।
मुकेश धीमान का सीधा आरोप है कि नरेश आठवीं पास है, लेकिन खुद को डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नरेश विश्वकर्मा ने सामाजिक चंदे से एकत्र करीब 10-12 लाख रुपये का गबन किया हुआ है और वे आज भी फर्जी रसीद छपवाकर समाज के लोगों से चंदा जुटा रहे हैं।
पदाधिकारियों ने डीएम और एसएसपी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया है और पुलिस व प्रशासन से नरेश विश्वकर्मा के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से बाबूराम पांचाल, शेरपाल पांचाल, प्रदीप धीमान, अशोक धीमान आदि मौजूद रहे।











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