मुजफ्फरनगर। 8 सितंबर 2013 को हुए मुजफ्फरनगर दंगों में हजारों लोग विस्थापित हुए थे। दंगाइयों ने घरों में घुसकर लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी की थी। इन दंगों से जुड़े एक मामले में मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश नेहा गर्ग ने 9 मई 2025 को लिसाड़ी कांड के 11 अभियुक्तों को बरी करने का फैसला सुनाया। अभियोजन अधिकारी नरेंद्र शर्मा कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं कर सके, जिसके चलते कोर्ट ने यह निर्णय लिया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता योगेंद्र शर्मा ने बताया कि कवाल में शुरू हुए हिंदू-मुस्लिम दंगे की आंच थाना फुगाना और थाना शामली के क्षेत्रों तक फैल गई थी। लिसाड़ी गांव, थाना फुगाना से संबंधित इस मामले में 11 व्यक्तियों पर घरों में लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप थे। वादी जिया उल हक ने थाना फुगाना में इन 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
बरी किए गए आरोपियों में मनवीर, सुभाष, पप्पन, नरेंद्र, प्रमोद, विनोद, रामकुमार शर्मा, विजय शर्मा, रामकिशन, राजेंद्र और मोहित शामिल हैं। अधिवक्ता योगेंद्र शर्मा ने बताया कि साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।











Discussion about this post