वाराणसी। गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने से वाराणसी में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। शनिवार शाम तक गंगा 69.96 मीटर तक पहुंच चुकी थी, जो चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से बेहद करीब है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, खतरे का निशान 71.262 मीटर है। गंगा का बहाव एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, जिससे सभी 84 घाट जलमग्न हो चुके हैं। इससे शहर का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी पूरी तरह डूब चुकी है, वहीं गंगा सेवा निधि की छत पर आरती आयोजित की जा रही है। अस्सी घाट पर गलियों में गंगा आरती हो रही है। मणिकर्णिका घाट का निचला शवदाह प्लेटफॉर्म जलमग्न हो गया है और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह किया जा रहा है। जगह की कमी के कारण अंतिम संस्कार के लिए 2-3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
अब तक 142 परिवार विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 65 राहत शिविरों में और बाकी अन्य सुरक्षित स्थानों पर रह रहे हैं। कुल 727 लोग सीधे प्रभावित हैं। प्रशासन ने 46 राहत शिविरों को चिह्नित किया है, जिनमें 7 सक्रिय हैं। प्रशासन द्वारा 10 नावों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। शनिवार को 582 लंच पैकेट, फल, दूध और ORS वितरित किए गए, वहीं 34 मरीजों का इलाज किया गया।
चांदपुर से मोकलपुर तक 500 एकड़ से ज्यादा खेत डूब चुके हैं। सब्जियां और चारे की फसलें बर्बादी के कगार पर हैं। राजस्व विभाग की टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। वहीं, गंगा में नौकायन पर रोक से हजारों नाविकों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है।
सदर तहसील का रामपुर ढाब गांव और सलारपुर, सरैया, नक्खीघाट, ढेलवरिया, दनियालपुर व हूकुलगंज जैसे शहरी वार्ड बुरी तरह प्रभावित हैं। वरुणा नदी में भी पलट प्रवाह शुरू हो गया है। नगवां, अस्सी, लंका मार्ग जैसे इलाके 2 फीट पानी में डूबे हैं, जिससे यातायात ठप हो गया है।
सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर:
0542-2508550, 2504170, 9140037137











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