मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जेल में पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के पास से मोबाइल फोन बरामद होने के बाद शुरू हुई जांच में अब कई जेलकर्मियों की नौकरी पर गाज गिर गई है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के बाद एक हेड वार्डर को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि चार जेल प्रहरियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ दिन पहले जिला कारागार में चेकिंग के दौरान पृथकवास बैरक से पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था। यह खुलासा अपने आप में चौंकाने वाला था, लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। मोबाइल बरामदगी की पूछताछ के दौरान शाहनवाज राणा ने जेलर राजेश कुमार सिंह के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उन्हें धमकी तक दे डाली।
इस घटना ने जेल प्रशासन को सकते में डाल दिया। जेलर की शिकायत पर नई मंडी कोतवाली में पूर्व विधायक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज की गई। शुक्रवार मध्यरात्रि को शासन के आदेश पर शाहनवाज राणा को चित्रकूट जेल ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन इस कांड की गूंज अभी थमने का नाम नहीं ले रही।
मोबाइल बरामदगी के बाद सवाल उठा कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा के बीच जेल के भीतर मोबाइल कैसे पहुंचा? जांच में बैरक के बाहर और जेल गेट नंबर दो पर तैनात जेलकर्मियों की लापरवाही सामने आई। इन जेलकर्मियों को नोटिस जारी किया गया। जिनके जवाब जेल अधीक्षक अभिषेक चौधरी को सौंपे गए।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सहारनपुर मंडल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक को भेजी गई। जिसके आधार पर सख्त एक्शन लिया गया। हेड वार्डर रामरूप को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। जबकि चार बंदी रक्षकों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी हुए। इस कार्रवाई से जेल स्टाफ में खलबली मच गई है।
जेल अधीक्षक अभिषेक चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा, “हेड वार्डर को सस्पेंड कर दिया गया है। चार बंदी रक्षकों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने दिए हैं। लेकिन यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि क्या यह कार्रवाई महज खानापूर्ति है या वास्तव में जेल की सुरक्षा में सुधार होगा? पूर्व विधायक जैसे हाई-प्रोफाइल कैदी के पास मोबाइल पहुंचना जेल प्रशासन की पोल खोल रहा है।










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