मुजफ्फरनगर। आज जिले में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय पर किसानो की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया। पंचायत का संचालन मोहित मलिक एवं अध्यक्षता हरपाल डायरेक्टर पुरबालियान ने किया ।
पंचायत को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जनपद का किसान समस्याओं से पस्त है लेकिन अधिकारी मस्त हैं। आज किसानो के सामने राजस्व की त्रुटि के कारण वित्त से वंचित हो रहे है। जनपद में गन्ना का उत्पादन गिर रहा है लेकिन अधिकारी एवं मिल कर्मी बीज बेचने में व्यस्त है। सहकारिता विभाग किसानो के ब्याज की सब्सिडी वापस नहीं हो रही है।
सुधीर पंवार ने कहा कि तहसील में अगर किसान खतौनी में नाम ठीक कराने के लिए जाता है तो अधिकारी मुकदमा दायर करने की बात करते है।आज अधिकतर किसान तहसील में खड़े है। सरकार मुकदमे कम करने की बात करती है दूसरी तरफ जबरदस्ती मुकदमे दायर कराए जा रहे है। विनीत त्यागी ने कहा कि सहकारी बैंक में पैसे जमा करने के बाद भी बकायेदार है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नही हो रही है
पंचायत को विपिन त्यागी,कुशलवीर ठाकुर,अमित ठाकुर, शुभम वत्स, शहजाद राव,बिजेंद्र बालियान, नीरज मलिक,योगेश मुखिया,सद्दाम हुसैन, मुन्ना सिंह,मोनू सोम, बाबर प्रधान, कासिम प्रधान सोरम, लतापत प्रधान, सहित कई लोगों ने संबोधित किया। पंचायत में सैकड़ों लोग शामिल रहे।
नगर मजिस्ट्रेट को जिलाधिकारी के नाम संबंध ज्ञापन दिया गया। नगर मजिस्ट्रेट महोदय ने संबंधित विभागों से 17 मार्च को संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कराकर समस्याओं के समाधान का आश्वाशन दिया।
ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया कि जनपद में किसानों को कई समस्याओं का समाधान लंबे समय से नही हो पा रहा है ।जिससे किसानो को अधिकारियों के चक्कर लगाने पद रहे है। आज दिनांक 10 मार्च को जिलाधिकारी कार्यालय मुजफ्फरनगर पर प्रदर्शन के माध्यम से भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक निम्न मांग करते है।
राजस्व विभाग- 1-जनपद में रियल टाइम खतौनी बनते समय किसानो के अंश एवं नाम दोनों में त्रुटियों होने के कारण किसानो को बैंकों से ऋण नहीं मिल रहा है। गलती सुधार हेतु किसान 6 माह से तहसील में चक्कर लगा रहे है लेकिन कोई समाधान नहीं हो पा रहा है।गांव में चौपाल लगाकर त्रुटियों में सुधार कराया जाए।
2- शासनादेश के अनुसार 13 दिन में विरासत दर्ज कराई जाए एवं बिना आपत्ति के दाखिल खारिज के दावों का निस्तारण 40 दिन की अवधि में किया जाय। दाखिल खारिज के दावों की सूची बनाकर मासिक समीक्षा की जाए।
3- लेखपालों द्वारा निजी सहायक रखने का चलन जोरो पर है।जिससे भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। ऐसे लेखपालों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए।











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