शामली। गाजियाबाद में रविवार देर रात बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए नोएडा पुलिस के सिपाही सौरभ देशवाल का मंगलवार को उनके पैतृक गांव बधेव (जनपद शामली) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोग उमड़ पड़े, हर आंख नम थी और हर चेहरा ग़मगीन।
इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा, एमएलसी वीरेंद्र सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि व अधिकारी पहुंचे। मंत्री दिनेश खटीक ने सरकार की ओर से शहीद सौरभ के परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और एक सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।
शहीद के पिता उत्तम कुमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि जिस प्रकार से बदमाशों ने उनके बेटे को मौत के घाट उतारा, ऐसे अपराधियों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए और उनका एनकाउंटर किया जाए ताकि भविष्य में कोई और सौरभ न शहीद हो। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उनके बेटे को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा दिया जाए।
घटना गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र की है, जहां रविवार रात नोएडा पुलिस की एसओजी टीम वांछित लुटेरे कादिर उर्फ मंटा को पकड़ने नाहल गांव पहुंची थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया, लेकिन जैसे ही टीम गांव से बाहर निकल रही थी, पंचायत भवन के पास छिपे उसके साथियों ने हमला कर दिया। पथराव और फायरिंग के बीच एक गोली सिपाही सौरभ कुमार के सिर में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
उन्हें तुरंत गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सौरभ की शहादत की खबर मिलते ही उनके गांव बधेव में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना की जानकारी मिलते ही गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह और एडिशनल कमिश्नर राजीव नारायण मिश्र मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बताया कि हमलावर बदमाशों की पहचान कर ली गई है और गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।
गांव बधेव निवासी सौरभ कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी मिसाल कायम की थी। उन्होंने सेंट फ्रांसिस स्कूल से दसवीं, सिल्वर बेल से बारहवीं और बीकॉम की डिग्री सिल्वर मैनेजमेंट कॉलेज से प्राप्त की थी। 2017 में यूपी पुलिस में भर्ती होकर उन्होंने एसओजी टीम में शामिल होकर कई ऑपरेशन में भाग लिया।
परिजनों के अनुसार, घटना से कुछ ही देर पहले सौरभ ने पत्नी से फोन पर बात की थी और घर लौटकर खाना खाने की बात कही थी, लेकिन यह आखिरी बातचीत साबित हुई।
शहीद सौरभ अपने माता-पिता का सबसे छोटा बेटा और सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था। उनके बड़े भाई रजत और पिता उत्तम कुमार खेती करते हैं।











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