मेरठ। गन्ना ढुलाई का भाड़ा घटाने और गन्ना मूल्य बढ़ाए जाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। कड़ाके की ठंड, शीतलहर और घने कोहरे के बावजूद किसान पिछले छह दिनों से गन्ना भवन में डेरा डाले हुए हैं। शनिवार को धरने के छठे दिन भी किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
छत पर चढ़े किसान, अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन-
आंदोलन के पांचवें दिन शुक्रवार को गन्ना भवन में भारी हंगामा देखने को मिला। अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से नाराज होकर 75 वर्षीय बुजुर्ग किसान इंद्रपाल मलिक और जसबीर गन्ना भवन की तीसरी मंजिल की छत पर चढ़ गए। इस दौरान दो किसानों ने अर्द्धनग्न होकर दीवार पर चढ़कर विरोध जताया, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। पुलिस और जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के समझाने के बाद उन्हें नीचे उतारा गया, जिसके बाद किसान छत पर ही धरने पर बैठ गए।
गन्ना कार्यालयों पर जड़ा ताला, कामकाज ठप-
गुस्साए किसानों ने उप गन्ना आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी और सहायक चीनी आयुक्त समेत सभी कार्यालयों के मुख्य द्वारों पर ताला जड़ दिया। इसके चलते विभाग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दफ्तर के भीतर नहीं जा सका और पूरा कामकाज ठप रहा।
वार्ता विफल, अब 21 दिसंबर को महापंचायत-
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में चल रहे इस धरने को लेकर प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता हुई है। किसानों का आरोप है कि दिन में अधिकारी आश्वासन देते हैं, लेकिन शाम तक बात बेनतीजा साबित होती है। जिला प्रशासन के रवैये से नाराज किसानों ने अब 21 दिसंबर (रविवार) को बड़ी ‘महापंचायत’ का ऐलान कर दिया है।
अधिकारियों की कार्यक्षमता पर सवाल-
धरनास्थल पर किसानों ने विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जो अधिकारी गन्ने की प्रजाति तक नहीं पहचान सकते, वे किसानों का दर्द क्या समझेंगे। हालांकि, मौके पर पहुंचे सहायक निबंधक सहकारिता ने पिछले वर्ष की सब्सिडी दिलाने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान मुख्य मांगों पर अड़े हुए हैं।











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