नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘वीर बाल दिवस’ के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक दूरदर्शी बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 1997 से 2012 के बीच जन्मी ‘डिजिटल-सक्षम’ जेन Z (Gen Z) पीढ़ी और 2013 के बाद जन्मे ‘तकनीक-केंद्रित’ जेन अल्फा (Gen Alpha) बच्चे ही भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य तक पहुंचाएंगे।
युवाओं की क्षमता पर अटूट भरोसा:
प्रधानमंत्री ने कहा, “जेन जी और जेन अल्फा ही भारत को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य तक ले जाने वाली पीढ़ी है।” उन्होंने युवाओं की क्षमताओं, आत्मविश्वास और सामर्थ्य को समझते हुए उन पर पूरा भरोसा जताया। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि व्यक्ति की महानता उसकी उम्र से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और उपलब्धियों से तय होती है, जैसा कि साहिबजादों के जीवन से प्रेरणा मिलती है।
साहिबजादों का बलिदान और गुलामी की मानसिकता पर प्रहार:
सही रास्ते पर चलने का आह्वान: प्रधानमंत्री ने वीर साहिबजादों (गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्रों) के अदम्य साहस को याद किया। उन्होंने कहा कि साहिबजादों ने रास्ते की कठिनाई नहीं, बल्कि रास्ते की सच्चाई और सही दिशा देखी। यही भावना आज के युवाओं में अपेक्षित है—बड़े सपने देखना और आत्मविश्वास बनाए रखना।
मैकाले की मानसिकता से मुक्ति: पीएम मोदी ने आजादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता बने रहने पर दुख जताया। उन्होंने 1835 में लॉर्ड मैकाले द्वारा बोए गए विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि अब देश ने तय कर लिया है कि 2035 तक इस मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होना है। यह 140 करोड़ भारतीयों का साझा संकल्प होना चाहिए।
शिक्षा और नवाचार का भविष्य:
प्रधानमंत्री ने भारत के भविष्य को बच्चों और युवाओं के भविष्य से जोड़ा। उन्होंने बताया कि देशभर में लाखों बच्चे ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ के माध्यम से रोबोटिक्स, एआई और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में नवाचार से जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा का विकल्प सीखने की प्रक्रिया को और सहज बना रहा है।
मोदी ने हालिया शीतकालीन सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद में हिंदी और अंग्रेजी के अलावा भारतीय भाषाओं में लगभग 160 भाषण दिए गए, जिनमें तमिल, मराठी और बंगाली प्रमुख रहीं। उन्होंने कहा कि यह दृश्य दुनिया की किसी भी संसद में दुर्लभ है और यह भारत की भाषाई विविधता की ताकत को दर्शाता है। मैकाले ने जिस विविधता को दबाने की कोशिश की थी, वही आज भारत की शक्ति बन रही है।
वीर साहिबजादों के बलिदान का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि औरंगजेब की क्रूर सत्ता के सामने भी चारों साहिबजादे अडिग रहे। यह संघर्ष भारत के मूल्यों और मजहबी कट्टरता के बीच, सत्य और असत्य के बीच था। गुरु गोबिंद सिंह जी त्याग और तपस्या के साक्षात प्रतीक थे और वही विरासत साहिबजादों को मिली थी। इसलिए पूरी मुगलिया ताकत भी उनके साहस को नहीं डिगा सकी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर बाल दिवस भावना और श्रद्धा से भरा दिन है। पिछले चार वर्षों में वीर बाल दिवस की परंपरा ने नई पीढ़ी तक साहिबजादों की प्रेरणा पहुंचाई है और बच्चों को राष्ट्रसेवा के लिए मंच दिया है। हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है; इस वर्ष भी देश के अलग-अलग हिस्सों से 20 बच्चों को यह सम्मान दिया गया।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को संदेश दिया कि वे शॉर्ट-टर्म लोकप्रियता की चमक-दमक में न फंसे, महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लें और अपनी सफलता को केवल व्यक्तिगत न मानें। उनका लक्ष्य होना चाहिए कि उनकी सफलता देश की सफलता बने। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने युवाओं को मंच दिया है। अब आवश्यकता है फोकस, परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण की—ताकि भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सके।











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