अलीगढ़। महानगर के वार्ड संख्या 71, ऊपर कोट क्षेत्र में मंगलवार सुबह नगर निगम की टीम ने वसूली के नाम पर मर्यादाओं की सारी हदें पार कर दीं। 94 हजार रुपये के प्रॉपर्टी टैक्स बकाया होने पर सहायक नगर आयुक्त की मौजूदगी में एक मकान को बाहर से सील कर दिया गया, जबकि परिवार और उनका 7 वर्षीय बेटा घर के अंदर ही थे।
नाश्ता बना रही थी मां, स्कूल जाने को तैयार था बच्चा-
घटना सुबह करीब 7 बजे की है। अफसर अली का 7 वर्षीय बेटा कामरान स्कूल जाने के लिए तैयार था और उसकी मां रसोई में नाश्ता बना रही थी। इसी बीच सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह भारी टीम के साथ पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के मुख्य द्वार पर सील ठोक दी। मासूम कामरान और उसके माता-पिता घर के भीतर ही बंधक बन गए।
गिड़गिड़ाता रहा परिवार, नहीं पसीजे अफसर-
मकान मालिक अफसर अली और उनकी पत्नी अंदर से शोर मचाते रहे, गिड़गिड़ाते रहे कि बच्चा स्कूल जाने वाला है, उसे बाहर जाने दें। स्थानीय पार्षद अब्दुल मुत्तलिब ने भी मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को बताया कि इस टैक्स के खिलाफ नगर निगम में आपत्ति दाखिल की गई है, जिस पर अभी विचार चल रहा है। पार्षद का आरोप है कि सहायक नगर आयुक्त अपनी गाड़ी से नीचे तक नहीं उतरे और दो टूक कहा— “बकाया जमा करो, तभी सील खुलेगी।”
उधार मांगकर बचाई जान-
घंटों तक चले इस हंगामे और मासूम की स्कूल जाने की बेबसी को देख पड़ोसियों ने मदद का हाथ बढ़ाया। गरीब अफसर अली के पास केवल 5 हजार रुपये थे, बाकी 5 हजार रुपये उसने मोहल्ले वालों से उधार मांगे। 10 हजार रुपये नकद जमा करने और बाकी रकम किस्तों में देने के लिखित आश्वासन के बाद ही निगम की टीम ने सील खोली और परिवार को ‘आजाद’ किया।
टैक्स की विसंगति पर सवाल-
पीड़ित परिवार का कहना है कि मात्र 50 गज के मकान का 94 हजार रुपये टैक्स आना समझ से परे है। इसी को लेकर पार्षद के माध्यम से आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन राहत देने के बजाय निगम ने सीधे घर में कैद करने जैसी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।










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