नई दिल्ली। अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ₹100 करोड़ की मानहानि वाली उस याचिका को खारिज कर दिया, जो उन्होंने पिछले साल अपने भाई शमसुद्दीन सिद्दीकी और अपनी पत्नी के खिलाफ दायर की थी।
अनुपस्थिति के कारण याचिका हुई रद्द-
याचिका खारिज होने का मुख्य कारण यह रहा कि सुनवाई के दौरान नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उनके वकील अदालत में मौजूद नहीं थे। अदालत ने गैर-प्रसिक्षण (non-prosecution) के आधार पर याचिका को रद्द कर दिया।
शमसुद्दीन सिद्दीकी की पैरवी कर रहे वकील अली काशिफ खान देशमुख ने कहा कि नवाजुद्दीन द्वारा दायर किया गया यह पूरा केस आधारहीन था और इसे केवल वित्तीय विवादों के बल पर उनके मुवक्किल पर दबाव बनाने के लिए दायर किया गया था।
नवाजुद्दीन के मुख्य आरोप-
नवाजुद्दीन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि:
उन्होंने 2008 में अपने भाई शमसुद्दीन को मैनेजर नियुक्त किया था और उस पर आँख मूंदकर भरोसा किया था, जिसके चलते क्रेडिट कार्ड, चेकबुक, बैंक पासवर्ड समेत सभी वित्तीय ज़िम्मेदारियाँ सौंप दी थीं।
शमसुद्दीन ने उन्हें धोखा दिया और जालसाजी की। कई संपत्तियां (फ्लैट, फार्महाउस, दुबई संपत्ति) और 14 वाहन (रेंज रोवर, बीएमडब्ल्यू, डुकाटी जैसे लग्जरी ब्रांड) संयुक्त रूप से खरीदे, जबकि नवाजुद्दीन को बताया गया कि वे केवल उन्हीं के नाम पर खरीदे जा रहे हैं।
उनके भाई और पत्नी ने उनके बारे में झूठे और बदनाम करने वाले बयान फैलाए, जिससे उनकी छवि और उन्हें मानसिक व सामाजिक हानि हुई।
कोर्ट का पिछला आदेश-
यह विवाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बाद शुरू हुआ था। कोर्ट ने पूर्व में आदेश दिया था कि दोनों पक्ष सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ कोई पोस्ट न करें, ताकि मामले को शांतिपूर्वक सुलझाया जा सके।
मामले के खारिज होने के बाद यह विवाद फिलहाल कानूनी तौर पर कोर्ट में बंद हो गया है, हालांकि दोनों पक्षों के बीच सामाजिक और पारिवारिक तनाव अब भी जारी है।











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