नई दिल्ली : भारत पाकिस्तान तनाव के बाद अब देश की घरेलू राजनीति पर एक बार फिर राजनीतिक पंडितों की नजर है. राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा है कि आखिर बीजेपी का अध्यक्ष कौन होगा.हुआ यह था कि बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टाल दिया था. लेकिन अब खबर आ रही है कि पार्टी ने फिर से इस दिशा में सक्रियता बढ़ा दी है. मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के तौर पर अब तक कई नामों पर चर्चा हुई. रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अब रेस में केवल दो नाम प्रमुख तौर पर बचे हैं.
दरअसल ये नाम कोई नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के हैं. एक मीडिया रिपोर्ट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जब जातिगत जनगणना जैसे सामाजिक समीकरणों पर ध्यान दे रही है तब पार्टी नेतृत्व में ओबीसी चेहरे को आगे लाकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है. धर्मेन्द्र प्रधान और भूपेंद्र यादव दोनों ही ओबीसी समुदाय से आते हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. ओडिशा में बीजेपी की बड़ी जीत के समय प्रधान का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए भी सामने आया था लेकिन वे केंद्र में मंत्री बने रहे.
इस बात की प्रबल संभावना है कि मई के अंत तक नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो सकता है. जिससे अक्टूबर नवंबर में प्रस्तावित बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियां नए नेतृत्व के साथ शुरू की जा सकें. हालांकि अभी इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
बीजेपी की राजनीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि धर्मेन्द्र प्रधान और भूपेंद्र यादव दोनों ही नेताओं ने कई राज्यों में बतौर चुनाव प्रभारी पार्टी को अच्छा प्रदर्शन दिलाया है. लेकिन अनुभव और संगठन पर पकड़ के लिहाज से धर्मेन्द्र प्रधान के नाम पर पार्टी नेतृत्व की सहमति बनने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाना है. सभी की निगाहें अब वहीं हैं.











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