मुजफ्फरनगर। मारपीट के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने गई पुलिस भाकियू नेता को थाने ले आई। देर रात गलती का एहसास होने पर उसे छोड़ दिया। गुरुवार को भाकियू नेता ने वीडियो वायरल कर अपना दर्द बयां किया। भाकियू कार्यकर्ताओं ने थाने पर हंगामा किया। गलती मानने के बाद कार्यकर्ता वापस लौट गए। तीन अक्तूबर को भूड़ क्षेत्र के मोहल्ला इस्लामाबाद में आस मोहम्मद और इरशाद चौहान पक्ष के बीच मारपीट हो गई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। मारपीट में फारूख नाम का व्यक्ति आरोपी है। दबिश के दौरान पुलिस आरोपी फारूख के घर जाने के बजाय गलतफहमी के चलते भाकियू कार्यकर्ता फारूख के घर पहुंच गई और उसे गिरफ्तार कर थाने ले आई। पुलिस ने गलतफहमी बताकर उसी रात भाकियू कार्यकर्ता को रिहा कर दिया था।
बृहस्पतिवार सुबह भाकियू एनसीआर अध्यक्ष कपिल सोम के साथ कार्यकर्ता थाने पहुंचे और हंगामा किया। भाकियू कार्यकर्ता फारुक ने बताया कि वह खुद को निर्दोष बताता रहा लेकिन पुलिस ने सुनवाई नहीं की। परिवार के लोगों के साथ अभद्रता की गई। पुलिस ने भाकियू कार्यकर्ताओं के सामने भूल स्वीकार की, इसके बाद मामला शांत हुआ। हंगामा करने वालों में प्रवेंद्र ढाका, सचिन चौधरी, जुल्फकार छोटा, दीपांकर चौहान, तहसील अध्यक्षत ललित त्यागी, अंकुश प्रधान शामिल थे।
आत्मदाह की चेतावनी का वीडियो हुआ था वायरल : भाकियू कार्यकर्ता फारुक ने पुलिस पर उसके तथा परिवार के लोगों के साथ अभद्रता का आरोप लगाते हुए आत्मदाह करने की चेतावनी की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी थी। इसके बाद भाकियू कार्यकर्ता एकत्र होकर थाने पहुंचे थे। वीडियो में फारुक ने बताया कि वह भाकियू में ब्लाॅक सचिव है। पुलिस ने उसे तथा उसके भाई के साथ मारपीट करते हुए प्रताड़ित किया गया। इस मामले में न्याय न मिलने पर थाने में आत्मदाह करने की चेतावनी दी गई थी।











Discussion about this post