पीलीभीत: पीलीभीत में समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यालय को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. नगर पालिका ने सपा के कार्यालय को अवैध रूप से चलाए जाने का आरोप लगाया है. अब इसे खाली करने का आदेश जारी हो गया है. लिहाजा इस कार्रवाई को अब अमलीजामा पहनाया जाएगा. इस कार्रवाई को लेकर अब स्थानीय प्रशासनिक अफसर और समाजवादी पार्टी आमने सामने आ गई है. मामला अखिलेश यादव तक पहुंच गया है और अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है. यूपी पुलिस भी कार्रवाई के लिए तैयार है और उसने यहां पूरी फोर्स खड़ी कर दी है वो भी पूरे 7 थानों की.
दरअसल, समाजवादी पार्टी का यह कार्यालय नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) के आवास में संचालित हो रहा था, जिसे अब खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. नगर पालिका की पूरी टीम भी इस अभियान में शामिल है. सपा कार्यालय का यह विवाद नया नहीं है. वर्ष 2005 में नगर पालिका ने नकटा दाना चौराहे के पास अपने अधिशासी अधिकारी के आवास को सपा कार्यालय के लिए डेढ़ सौ रुपये मासिक किराए पर आवंटित किया था. यह आवंटन उस समय के नियमों और प्रक्रियाओं के तहत किया गया था, लेकिन बाद में इसे अनियमितता का हवाला देकर रद्द कर दिया गया. 12 नवंबर 2020 को नगर पालिका ने इस आवंटन को रद्द करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी.
इसके बाद सपा ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की. तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन 1 दिसंबर 2020 को उन्होंने इसे खुद ही वापस ले लिया. इसके बाद,वर्ष 2021 में सपा ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में इस मामले को लेकर मुकदमा दायर किया, जो अभी भी विचाराधीन है.
नगर पालिका ने सपा को 10 जून 2025 तक कार्यालय खाली करने का नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में यह साफ कहा गया था कि सपा कार्यालय अवैध रूप से संचालित हो रहा है और इसे तुरंत खाली किया जाए. हालांकि सपा ने इस आदेश को नहीं माना. इसके बाद नगर पालिका ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई का फैसला किया.
अब 18 जून यानि आज नगर पालिका इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए व्यापक तैयारी की है. सात थानों की पुलिस फोर्स और 200 सिपाहियों की तैनाती इस दफ्तर के बाहर की गई है. यानि इसे खाली कराने की पूरी तैयारी है. नगर पालिका की पूरी टीम भी इस अभियान में शामिल है.
उधर, सपा के लोकसभा प्रभारी वीरपाल सिंह ने पीलीभीत पहुंचकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पीडीए की बैठक की है. उन्होंने कार्यालय खाली कराने की कार्रवाई को अलोकतांत्रिक करार दिया है और कहा है कि सपा इस मुद्दे पर दो स्तरों पर संघर्ष करेगी. एक न्यायालय में और दूसरा जनता के साथ सड़क पर. सपा नेता ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जबरदस्ती की तो कार्यकर्ता कार्यालय के बाहर लेट जाएंगे. उन्होंने बताया कि पार्टी पिछले 25 वर्षों से इस स्थान पर है. यह मामला सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के संज्ञान में है. पूर्व जिलाध्यक्ष आनंद सिंह का एक मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है. इस संबंध में पूछे गए सवाल पर वीरपाल सिंह ने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया.











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