श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति से आज एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। घाटी के प्रमुख उदारवादी अलगाववादी नेता और धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के बायो से अपना प्रमुख पदनाम ‘अध्यक्ष, सर्वदलीय हुर्रियत सम्मेलन’ हटा दिया है।
घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:
बदला हुआ डिजिटल बायो:
मीरवाइज के ‘एक्स’ हैंडल पर दो लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उनके हालिया प्रोफाइल बदलाव के बाद अब बायो में केवल उनका नाम और स्थान विवरण (Location) ही दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि उन्होंने इस बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया है।
निष्क्रियता और प्रतिबंध:
साल 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से ही मीरवाइज के नेतृत्व वाली ‘उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस’ लगभग निष्क्रिय रही है। केंद्र सरकार ने इस समूह के अधिकांश घटक संगठनों, जिसमें मीरवाइज की अपनी ‘अवामी एक्शन कमेटी’ (AAC) भी शामिल है, पर प्रतिबंध लगा दिया है।
बदलते सुर:
पिछले 6 वर्षों में इस समूह ने शायद ही कोई राजनीतिक बयान जारी किया हो। हालांकि, मीरवाइज श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार के प्रवचनों के दौरान लगातार कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच ‘संवाद’ की वकालत करते रहे हैं।
राजनीतिक मायने:
विशेषज्ञों का मानना है कि मीरवाइज का यह कदम कश्मीर की बदलती जमीनी हकीकत और नई राजनीतिक परिस्थितियों के साथ खुद को ढालने की कोशिश हो सकता है। ‘हुर्रियत’ शब्द को अपने नाम से अलग करना अलगाववादी राजनीति से किनारा करने या भविष्य में किसी नई भूमिका की ओर इशारा भी हो सकता है।











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