लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। चुनाव की तैयारी के तहत जिलों में वार्डों के पुनर्गठन का काम 10 अगस्त को पूरा हो चुका है। इस बीच पता चला है कि अभी तक पंचायतीराज निदेशालय को सिर्फ 22 जिलों ने ही रिपोर्ट भेजी है। जिसके कारण सभी जिलों की समग्र अंतिम सूची तैयार नहीं हो पा रही है। ऐसे में अब 53 जिलों को चेतावनी पत्र जारी कर जल्द रिपोर्ट मांगी गई है। ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के बाद वार्डों के पुनर्गठन का काम बीते 18 जुलाई को शुरू हुआ था।

जिन 22 जिलों से वार्डों के पुनर्गठन की रिपोर्ट आई है, उनमें अलीगढ़, फतेहपुर, हापुड़, इटावा, हाथरस, अयोध्या, लखनऊ, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, मुजफ्फरनगर, बाराबंकी, गोरखपुर, अमरोहा, सिद्धार्थनगर, गौतमबुद्धनगर, शाहजहांपुर, कन्नौज, अंबेडकरनगर, एटा, जालौन, चंदौली और देवरिया शामिल हैं।
जिलों में 18 जुलाई से शुरू हुई वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत पांच अगस्त तक आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद छह से 10 अगस्त तक जिलों में वार्डों की अंतिम सूची का प्रकाश किया गया। फिर 12 अगस्त तक सभी जिलों को सूचना पंचायतीराज निदेशालय को भेजनी थी लेकिन अभी तक 53 जिलों ने निदेशालय को जानकारी नहीं भेजी। अभी ग्राम पंचायतों में 731811 वार्ड हैं और अब 4608 वार्ड घट जाएंगे।
वहीं क्षेत्र पंचायतों के 75855 वार्ड हैं और इसमें से 250 घटेंगे। जिला पंचायतों में 3051 वार्ड हैं और इसमें से 12 वार्ड अब कम हो जाएंगे। प्रदेश में 1000 की जनसंख्या पर वार्डों की संख्या नौ, 1001 से 2000 तक 11, 2001 से 3000 तक 13 और इससे अधिक कितनी भी जनसंख्या होने पर 15 वार्ड बनाए गए हैं।
इस बीच 19 अगस्त से उत्तर प्रदेश में मतदाता पुनरीक्षण का काम शुरू हो गया है। इस अभियान के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना है। मतदाताओं से संपर्क करके बीएलओ उनके नाम, पते, उम्र, लिंग की जानकारी जुटाएंगे। इसके साथ ही 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए वोटरों का नाम भी लिस्ट में शामिल करेंगे।











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