मेरठ। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के भीतर घमासान मचा हुआ है। इस बार मामला पार्टी के भीतर अनुसूचित जाति से जुड़े नेताओं को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी का है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) त्रिलोक त्यागी पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने एक बैठक के दौरान अनुसूचित जाति के नेताओं के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
बताया जाता है कि त्रिलोक त्यागी ने उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के सदस्य नरेंद्र खजूरी का नाम लेते हुए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इससे पार्टी के भीतर नाराजगी का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़ा झटका पार्टी को तब लगा जब खुद रालोद के राष्ट्रीय महासचिव केपी चौधरी ने त्यागी के खिलाफ सार्वजनिक मोर्चा खोल दिया। चौधरी ने एक सात पन्नों का कड़ा पत्र लिखकर आरोप लगाया कि त्यागी की भाषा न केवल असंवैधानिक थी बल्कि उससे
पार्टी के दलित वर्ग के नेताओं की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने सात दिन के भीतर कोई कड़ा कदम नहीं उठाया तो वह इस पूरे प्रकरण को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक लेकर जाएंगे और कानूनी रास्ता अपनाएंगे। इस पत्र ने अब रालोद की अंदरूनी राजनीति को गरमा चुका है।
पार्टी के कार्यकर्ता असमंजस में हैं और दलित वर्ग से जुड़े नेता खासे नाराज बताए जा रहे हैं। शीर्ष नेतृत्व अभी तक चुप्पी साधे है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह विवाद रालोद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर उस समय जब पार्टी आगामी स्थानीय चुनावों की तैयारी में जुटी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व त्रिलोक त्यागी पर कार्रवाई करता है या यह मामला और लंबा खिंचता है।











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