मुजफ्फरनगर। शेरनगर के किसानों का यह आंदोलन सिर्फ जमीन की रक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि आजादी के दिन अपने हक की लड़ाई का जीवंत उदाहरण बन गया है। जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब शेरनगर समेत छह गांवों के किसानों ने इस दिन को अपनी जमीन बचाने के आंदोलन के रूप में मनाया स्वतंत्रता दिवस। शेरनगर, बिलासपुर, धंधेड़ा, कूकड़ा, सरवट और अलमासपुर के किसानों ने खेतों में तिरंगा फहराया और अपनी उपजाऊ जमीन को निजी बिल्डरों को दिए जाने के विरोध में संकल्प लिया।
किसानों का आरोप है कि सरकार “आवास विकास योजना” के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीनें प्राइवेट बिल्डरों को सौंपने जा रही है। उनका कहना है कि यह साजिश भू-माफियाओं के साथ मिलकर रची जा रही है।
किसान तौसीफ चौधरी ने कहा, “यह हमारी मिट्टी है, हमारे पूर्वजों की पहचान है। हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। जैसे शहीदों ने देश के लिए जान दी, वैसे ही हम भी अपनी जमीन के लिए कुर्बान होने को तैयार हैं।” किसानों ने सरकार से मांग की है कि उनकी भूमि अधिग्रहण की योजना को तुरंत रद्द किया जाए और ग्रामीणों की सहमति के बिना कोई भी फैसला न लिया जाए।











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