बागपत : सरोरा गांव में पानी की सप्लाई करने वाली टंकी में दो बंदर गिर गए और उनकी मौत हो गई। पानी में से बंदर के बाल, कीड़े निकलने लगे, तो ग्रामीणों को इस बात का पता चला। कई बच्चों की हालत गंभीर है।
दाहा स्थित सरोरा गांव में पेयजल टंकी में दो बंदर डूबकर मर गए। टंकी का पानी पीने से गांव के 20 बच्चों और ग्रामीणों की हालत बिगड़ गई। पानी से बदबू, बंदर के बाल और कीड़े निकलने पर जाकर देखा गया, तो ग्रामीणों को टंकी में बंदरों के मरे पड़े होने का पता चला। इसके बाद ग्रामीणों ने बंदरों के शवों को निकालकर दबवाया। उधर, टंकी से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई और उसकी सफाई कराई जा रही है। मगर सवाल ये भी उठता है कि टंकी का ढक्कर खुला हुआ क्यों था।
हिंडन नदी किनारे बसे तमेलागढ़ी ग्राम पंचायत के मजरे सरोरा में वर्ष 2018 में एनजीटी के आदेश पर हैंडपंप उखाड़ दिए गए थे। इसके बाद वहां पर पानी की सुविधा के लिए पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया। ग्रामीण धीर सिंह, मुकेश, विनीत आदि ने बताया कि पिछले कई दिनों से घरों में टंकी से जाने वाले पानी को पीने के बाद ग्रामीणों की हालत खराब होने लगी।
इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन तीन दिन पहले टंकी से बंदर के बाल, कीड़े और ज्यादा बदबू आने लगी। इस पर उन्होंने पेयजल टंकी पर चढ़कर देखा तो उसमें दो बंदर मृत पड़े मिले, जिनके शव भी कई दिन पुराने होने के कारण सड़ चुके थे। उन्होंने गांव में टंकी के पानी की सप्लाई बंद कराई और बंदरों के शवों को बाहर निकलवाकर गड्ढे की खोदाई कराकर दबवाया।
प्रेरणा, देव, शिवा, मंजू, अक्षरा, श्रवण, विराट, पायल, चंद्रपाल, सोनू, मुकेश, अंकुश, रोहण, अजय समेत 20 से अधिक की हालत बिगड़ चुकी है। उल्टी, सिर में दर्द समेत अन्य समस्याएं होनी लगीं। उनका निजी चिकित्सकों से उपचार कराया गया। बताया कि तीन बच्चों की हालत ज्यादा खराब होने पर मेरठ के अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है।
सरोरा गांव निवासी विनीत, पारुल, धीर सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद बंदरों के शवों को टैंक से बाहर निकाला। इसके बाद उनकी भी हालत बिगड़ गई और गांव के चिकित्सक से उपचार कराया।
ग्रामीणों को आंतों में संक्रमण, लीवर में बीमारी हो सकती है। पानी पीने वाले ग्रामीण लापरवाही न बरतें। अस्पताल में जाकर जांच कराकर सही उपचार कराएं।
– डा. श्रवण गोस्वामी, सीएचसी बागपत
गांव में पेयजल टंकी के संचालन के लिए कोई केयरटेकर नहीं रखा गया। क्योंकि केयर टेकर के मानदेय की व्यवस्था नहीं है और ग्रामीण जलशुल्क जमा नहीं करते। एक व्यक्ति को पानी चलाने के लिए चाबी दे रखी है। टंकी पर दिनभर बंदर डेरा डाले रहते है, उन्हें कई बार भगाया भी जाता है। टंकी की सफाई कराने के बाद पानी की आपूर्ति की जाएगी।
– नीरज देवी, ग्राम प्रधान, तमेलागढ़ी











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