लखनऊ: जनसंख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े देश भारत में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। चाहे बात राज्य सरकार की या केंद्र सरकार की, बेरोजगारी हर किसी के लिए टेंशनभरी बात है। जनसंख्या के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी इससे बचा नहीं है। हालांकि अब राज्य की योगी सरकार इससे निपटने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है।
योगी सरकार ने अब प्रदेश के युवाओं की नौकरी के लिए और उनकी क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए खास इंतजाम किया है, जिसके तहत पहली बार जिला स्तर पर स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कौशल विकास की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस स्कीम के तहत युवाओं को उन्हीं क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी जाएगी, जिनकी उस संबंधित जिले में सबसे ज्यादा डिमांड है।
युवाओं की खातिर तैयार हुई इस स्कीम के तहत हर जिले में पांच प्रमुख सेक्टरों की पहचान की जा रही है। जिस सेक्टर का भी चुनाव किया जाएगा, वहां की पांच अग्रणी कंपनियों को भी चिन्हित किया जाएगा। यहां किसी का भी चयन स्थानीय उद्योगों की मांग, रोजगार की संभावनाएं और तकनीकी जरूरतों पर निर्भर रहेगा।
इससे युवाओं को यह फायदा होगा कि उन्हें ट्रेंनिंग के बाद उन्हीं कंपनियों में सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस मिशन की अहम कड़ी कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे है, जिन्होंने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ बैठक कर योजना की रूपरेखा साझा की है।
इन सभी का मिशन इस योजना को अगले तीन सालों में पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू करना है। इस योजना के तहत मुख्य विकास अधिकारियों को 26 सेक्टरों की लिस्ट सौंपी गई है, जिनमें से उन्हें अपने जिले के लिए पांच उपयुक्त सेक्टर्स का सिलेक्शन करना है।










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