नई दिल्ली : 1 अप्रैल 1948 को भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया था, जिससे पाकिस्तानी पंजाब की 17 लाख एकड़ जमीन पानी को तरस गई थी. अगर भारत आज इन नदियों के पानी रोक देता है तो पाकिस्तान में हाहाकार मच जाएगा.
पहलगाम में हुए आतंकी हमले में एक बार फिर पाकिस्तानी साजिश की बू आ रही है. खुफिया सूत्रों का कहना है कि आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई. हमले के पीछे हाफिज सईद के करीबी सैफुल्लाह कसूरी का हाथ होने की बात कही जा रही है. ऐसे में देश में एक बार फिर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी है. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर उतरे लोग पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाए जाने की बात कर रहे हैं. बता दें, इस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई, 17 लोग घायल हैं.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद सभी का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर है. लोग भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में हम आपको उस सिंधु जल संधि के बारे में बताएंगे, जिसे रद्द करके भारत एक झटके में पूरे पाकिस्तान को प्यासा मार सकता है. बता दें, कई बार पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सिंधु जल संधि को रद्द करने की मांग भारत में उठ चुकी है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक बार फिर इस जल संधि को खत्म करने की मांग हो रही है.
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद दोनों देशों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह समझौता किया गया था. 19 सितंबर, 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत छह नदियों ब्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे. इस समझौते के तहत पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों चिनाब, झेलम और सिंधु से संपूर्ण जल प्राप्त होता है. वहीं भारत को सतलुज, व्यास और रावी नदियों का जल प्राप्त होता है.
बता दें, आजादी के बाद पाकिस्तान के साथ कई जंग लड़ चुके भारत ने कभी भी इस समझौते को नहीं तोड़ा और न ही पाकिस्तान का पानी रोका. इस समझौते के मुताबिक, कोई भी देश एकतरफा इस संधि को नहीं तोड़ सकता और नियम को भी नहीं बदल सकता है. भारत और पाकिस्तान को मिलकर ही इस संधि में बदलाव करना होगा और नया समझौता बनाना होगा. लगातार आतंकी साजिशों के बाद भी भारत ने इस समझौते को बनाए रखा है.
बता दें, विश्व बैंक की लंबी मध्यस्थता के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता हुआ था. इस समझौते के लागू होने से पहले 1 अप्रैल 1948 को भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया था, जिससे पाकिस्तानी पंजाब की 17 लाख एकड़ जमीन पानी को तरस गई थी. ऐसे में अगर भारत आज के समझ में इन नदियों के पानी रोक देता है तो पाकिस्तान में हाहाकार मच जाएगा. हालांकि, भारत के इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान के पास विश्व बैंक में अपील करने का अधिकार होगा.











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