लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के बहाने मतदाताओं को सूची से हटाने और लोकतंत्र से धोखा करने का आरोप लगाया है।
बीएलओ और कर्मचारियों पर दबाव का आरोप-
अखिलेश यादव ने कहा है कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और अन्य कर्मचारियों पर जबरदस्ती काम का बोझ डाला जा रहा है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
फतेहपुर में घटना: उन्होंने फतेहपुर में एक सुपरवाइजर द्वारा आत्महत्या किए जाने का जिक्र किया, जिसके लिए उन्होंने कथित तौर पर सरकार के दबाव को जिम्मेदार ठहराया।
शादियों का समय: उन्होंने बताया कि यूपी में इस समय शादियों का मौसम है और लोग व्यस्त हैं, लेकिन सरकार को इसकी परवाह नहीं है।
सफाई कर्मियों की ड्यूटी: उन्होंने कहा कि फार्म भरवाने के लिए नगर निगम के सफाई कर्मियों को भी इस काम में लगाया जा रहा है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप-
सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
आयोग पर मिलीभगत का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर उन विधानसभा सीटों से 50,000 वोट काटने की साजिश रच रहे हैं, जहां विपक्ष ने बेहतर प्रदर्शन किया था।
बंगाल का उदाहरण: उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग भी चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि उसके हाथ खून से रंगे हैं।
मृतक के परिवार से मुलाकात: अखिलेश ने मृतक सुपरवाइजर के परिवार से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की और 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया।
विपक्षी और एनडीए के सहयोगी दलों से अपील-
अखिलेश यादव ने सभी विपक्षी दलों के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों से भी इस साजिश के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया है।
एनडीए सहयोगियों को चेतावनी: उन्होंने कहा कि जो दल आज भाजपा को सहयोगी मान रहे हैं, भाजपा सबसे पहले उन्हीं का सफाया करेगी।
देशवासियों से अपील: उन्होंने सभी लोगों से कहा है कि वे एसआईआर की इस घपलेबाजी को रोकने के लिए अपने सारे काम छोड़कर आगे आएं।
लोकतंत्र के लिए खतरा-
अखिलेश ने एसआईआर को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताया है।
पहचान मिटाने की साजिश: उन्होंने कहा कि आज वोट काटे जा रहे हैं, कल खेत, जमीन, मकान, राशन, जाति और आरक्षण से भी नाम हटाए जाएंगे।
गुलामी से बदतर स्थिति: उन्होंने इसे देशवासियों के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश बताया, जो देश को अंग्रेजों की गुलामी से भी बदतर स्थिति में ले जा सकती है।










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