मुजफ्फरनगर। बुधवार को हुई थोड़ी सी बारिश ने नगर पालिका की पूरी तैयारियों की पोल खोल दी। नगर पालिका चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप भले ही नालों की सफाई का दावा कर रही हों, लेकिन हकीकत यह है कि शहर की गलियाँ, कॉलोनियाँ और बाज़ार एक बार फिर पानी से लबालब हो गए हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं को जलभराव और गंदगी से गुजरना पड़ा, जिससे उनकी आस्था को ठेस पहुँची।
नगर के प्रमुख बाजार, मंदिर मार्ग और चौराहे जलमग्न हो गए। बारिश के चलते ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भारी जलभराव से गुजरना पड़ा, कई जगहों पर गाड़ियों के इंजन बंद हो गए और लंबा जाम लग गया। बारिश का प्रभाव कांवड़ मार्गों पर भी साफ दिखा—कीचड़, गंदा पानी और अव्यवस्था श्रद्धालुओं की परीक्षा लेने को तैयार थे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका हर बार सिर्फ कागजों पर सफाई करती है। नालों की सफाई ना समय पर होती है, ना ही बारिश के लिए कोई स्थाई इंतजाम किए गए हैं। वार्ड स्तर पर भी कोई ठोस निगरानी नहीं दिखती। सभासद भी चेयरमैन को फीडबैक नहीं देते, जिससे व्यवस्था राम भरोसे नजर आती है।
शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी तेज बारिश का असर देखने को मिला। गांवों की गलियों और खेतों में पानी भर गया। निचले इलाकों में घरों में पानी घुस गया। किसानों की खरीफ फसलें जलभराव से प्रभावित हो सकती हैं, खासकर धान, गन्ना और सब्जी की फसलें। किसान अब खेतों से पानी निकालने की जद्दोजहद में लग गए हैं।
जहां एक ओर इस बारिश ने उमस से राहत दी, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की व्यवस्था की हकीकत भी सामने ला दी। कांवड़ यात्रा जैसे बड़े पर्व के दौरान भी जब प्रशासन अलर्ट नहीं दिखा, तो आम दिनों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।










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