संभल। संभल के बाजारों में इन दिनों टमाटर ने मानो अपने तेवर दिखा दिए हैं। जहां पिछले सप्ताह टमाटर 20 से 30 रुपये प्रति किलो के दाम पर आसानी से मिल रहे थे, वहीं अब यह कीमत बढ़कर 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अचानक हुई इस तेजी ने आम उपभोक्ताओं के बजट को हिला दिया है और रसोई का खर्च बढ़ गया है। दामों में इस उछाल का असर सीधे-सीधे खाने की थाली पर देखने को मिल रहा है।
मंडी व्यापारियों के अनुसार, पिछले दिनों हुई अनियमित बारिश के कारण खेतों में टमाटर की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। फलस्वरूप मंडियों में आवक कम हो गई है। जब सप्लाई कम होती है और मांग पहले जैसी बनी रहती है, तो स्वाभाविक रूप से कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि संभल की मंडियों में अचानक टमाटर के दाम आसमान छूने लगे हैं।
बारिश से सड़न, परिवहन में देरी और बढ़ी समस्या-
व्यापारियों का कहना है कि खेतों में पानी भरने से फसल सड़ गई और जो टमाटर मंडी तक पहुंच पाया, वह भी परिवहन की देरी और लागत बढ़ने के कारण महंगा हो गया। बारिश ने सड़क मार्गों को भी प्रभावित किया, जिससे ट्रकों की आवाजाही धीमी रही। इस पूरी स्थिति ने खुदरा दुकानों में टमाटर की उपलब्धता घटा दी और कीमतें उपभोक्ताओं के पहुंच से दूर होती चली गईं।
गृहिणियों ने बदला रसोई का ‘टेस्ट प्लान’-
महंगाई का सीधा असर घर की रसोई पर हुआ है। कई गृहिणियों ने बताया कि बढ़ती कीमतों के चलते वे टमाटर का उपयोग कम कर रही हैं और उसकी जगह कच्चा आम, इमली, दही या तैयार ग्रेवी मसालों का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे कई घरों में व्यंजनों के स्वाद में noticeable बदलाव महसूस किया जा रहा है और रोजमर्रा की थाली में आवश्यक खटास व स्वाद कम हो गया है।
नए सीजन की उम्मीद, जल्द मिल सकती है राहत-
किसानों और व्यापारियों का कहना है कि जैसे ही नई फसल बाजार में आने लगेगी, स्थिति सामान्य होने की संभावना है। उनका अनुमान है कि यदि मौसम सामान्य रहा और सप्लाई में सुधार हुआ, तो दिसंबर की शुरुआत तक टमाटर की कीमतें फिर से स्थिर होकर नीचे आ सकती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं और दुकानदारों दोनों की नजर आने वाली आवक पर टिकी हुई है।











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