लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) की तरफ से आयोजित रिव्यू ऑफिसर/असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर (RO/ARO) भर्ती – 2023 की शुरुआती परीक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन को इस बारे में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
जस्टिस मनीष माथुर की सिंगल बेंच ने विवेक यादव समेत पांच कैंडिडेट्स की याचिका पर यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर तय की है।
याचियों के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने न्यायालय को बताया कि प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में ओबीसी अभ्यर्थियों का कटऑफ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक था। इसके बावजूद, इन ओबीसी अभ्यर्थियों को प्री-परीक्षा में फेल करके होने वाली मुख्य परीक्षा के लिए अयोग्य करार दिया गया।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरीके से आयोग ने प्री-परीक्षा में ओबीसी आरक्षण में कथित अनियमितता की और ओबीसी सीटों को सामान्य वर्ग में समायोजित किया, जो आरक्षण कानून की मंशा के खिलाफ है। याचियों ने न्यायालय से प्री परीक्षा परिणाम की मेरिट सूची का पुनः निर्धारण किए जाने का आग्रह किया है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की ओर से भी अधिवक्ता पेश हुए। अब न्यायालय के आदेश के बाद आयोग को 15 दिसंबर से पहले इस गंभीर आरोप का जवाब हलफनामे के माध्यम से देना होगा।










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