मेरठ। मेरठ के सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में किशोरी से दुष्कर्म की घटना ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं।
कॉलेज के उपप्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टॉक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज बालियान, प्रभारी अधिकारी आउटसोर्स डॉ. तरुण लाल, और उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड के सुपरवाइजर्स शामिल हुए। बैठक में किशोरी के साथ हुए दुष्कर्म मामले पर गहन चर्चा हुई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
बैठक में मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए , रजिस्टर में तीमारदारों का विवरण: पीएमएसएसवाई ब्लॉक (लाल बिल्डिंग) और आपातकालीन विभाग में रात के समय आने वाले मरीजों के तीमारदारों के नाम और विवरण रजिस्टर में दर्ज किए जाएंगे। सिंगल गेट एंट्री: चिकित्सालय की पुरानी बिल्डिंग में रात के समय केवल एक गेट से प्रवेश की अनुमति होगी, ताकि अनधिकृत प्रवेश को रोका जा सके। सुरक्षा गार्डों को निर्देश: गार्डों ने बताया कि कुछ भिक्षा मांगने वाले लोग आपातकालीन विभाग, पीएमएसएसवाई ब्लॉक, और पुरानी बिल्डिंग के आसपास घूमते रहते हैं और बार-बार चेतावनी के बावजूद नहीं हटते। उन्हें निर्देश दिया गया कि ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस की मदद ली जाए। पुलिस चौकी की तैनाती: थानाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज मेरठ ने आश्वासन दिया कि आपातकालीन विभाग के बाहर बनी पुलिस चौकी में 24 घंटे दो पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।
बैठक में बताया गया कि दुष्कर्म की शिकार किशोरी का ऑपरेशन शुक्रवार को सफलतापूर्वक कर लिया गया है और वह स्वस्थ है। इस घटना ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है।
किशोरी के साथ दुष्कर्म की यह घटना मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है। इस तरह की घटनाएं मरीजों और उनके परिजनों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की व्यापक चर्चा हो रही है, और लोग प्रशासन से कठोर कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं।
मेरठ मेडिकल कॉलेज में पहले भी सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। भिक्षा मांगने वालों और अनधिकृत व्यक्तियों का परिसर में घूमना एक पुरानी समस्या रही है। इस घटना के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है और सुरक्षा गार्डों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। पुलिस चौकी की स्थायी तैनाती और रजिस्टर में तीमारदारों के विवरण दर्ज करने जैसे कदम इस दिशा में सकारात्मक पहल हैं।
इस घटना ने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि अस्पताल परिसरों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए और रात के समय सुरक्षा गार्डों की तैनाती को और प्रभावी किया जाए। साथ ही, ऐसी घटनाओं के दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग भी जोर पकड़ रही है।











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