नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ लंच करने वाले हैं. यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. इस मुलाकात ने भारत में कई सवाल खड़े किए हैं. खासकर तब जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा है. खुद अमेरिका आतंकवाद की पीड़ा झेल चुका है. कई मौके पर उसके अधिकारी आतंकवाद को संरक्षण देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना कर चुके हैं. दूसरी तरफ अमेरिका, भारत को अपना रणनीतिक साझेदार भी बताता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका, पाकिस्तान के सेना प्रमुख को इतना महत्व क्यों दे रहा है? क्या भारत के साथ कोई छलावा हो रहा है.
दरअसल, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर हाल ही में उस समय विवादों में आए जब भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के लिए उनकी भड़काऊ बयानबाजी को जिम्मेदार ठहराया. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की गई. इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हमले किए जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया. फिर भारत ने बड़ी जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तान ने सीजफायर की गुहार लगाई. फिर दोनों देशों के बीच सीफायर हो गया. इस बीच, ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाया.
मुनीर की वॉशिंगटन यात्रा की खबर से भारत में हलचल है. पहले व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया था कि 14 जून को आयोजित अमेरिकी सेना की 250वीं वर्षगांठ परेड में किसी भी विदेशी सैन्य नेता को आमंत्रित नहीं किया गया था, लेकिन अब ट्रंप और मुनीर की होने जा रही मुलाकात ने नए सवाल खड़े किए हैं.
इस मुलाकात के कई संभावित कारण हो सकते हैं. पहला, अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी लड़ाई में शानदार साझेदार बताया है. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला ने पाकिस्तान की आईएसआईएस-खोरासान के खिलाफ कार्रवाइयों की तारीफ की, खासकर काबुल के एबे गेट पर हुए हमले के एक प्रमुख आतंकी की गिरफ्तारी के लिए. दूसरा, पाकिस्तान की चीन के साथ गहरी साझेदारी, खासकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) अमेरिका के लिए चिंता का विषय है. मुनीर की यात्रा को अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को अपने पक्ष में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, ताकि वह चीन के प्रभाव को संतुलित कर सके.
इसके अलावा हाल में एक क्रिप्टोकरेंसी डील हुई है. इसमें ट्रंप परिवार से जुड़ी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल शामिल है. इस डील में मुनीर की सीधी भागीदारी की खबरें हैं, जिससे भारत और वॉशिंगटन में संदेह बढ़ा है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका, पाकिस्तान के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर मध्य एशिया में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है. यह ईरान-इज़रायल तनाव के बीच को देखते हुए और महत्वपूर्ण हो गया है. पाकिस्तान ने ईरान का खुलकर समर्थन किया है.
भारत के लिए यह मुलाकात कई कारणों से चिंताजनक है. पहला मुनीर की कश्मीर को लेकर भड़काऊ बयानबाजी और आतंकवाद को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका से भारत चिंतित है. दूसरा अमेरिका कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता का प्रस्ताव देते रहा है. इसे भारत ने बार-बार खारिज किया है. इस मुनीर की इस मुलाकात से कश्मीर मुद्दा फिर से चर्चा में आ सकता है. भारत ने स्पष्ट किया है कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती.
मुनीर की यात्रा को अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ संबंधों को सुरक्षा से आर्थिक और संसाधन-आधारित साझेदारी में बदलना चाहता है. क्रिप्टोकरेंसी और महत्वपूर्ण खनिज जैसे विषय इस मुलाकात के एजेंडे में हो सकते हैं. हालांकि, पाकिस्तान का ईरान के प्रति समर्थन और चीन के साथ उसकी गहरी साझेदारी अमेरिका के लिए जटिलताएं पैदा कर सकती हैं.











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