दिल्ली। देश में जाट समुदाय की सबसे बड़ी शिक्षण संस्था माने जाने वाले सूरजमल संस्थान पर कब्जा करने की भारतीय जनता पार्टी की कोशिश नाकाम हो गई और भाजपा का पूरा पैनल बुरी तरह हार गया।
सूरजमल संस्थान देश में जाटों की एक बड़ी शिक्षण संस्था है, जिसके दिल्ली समेत कई जगहों पर बड़े शिक्षण संस्थान हैं। इस संस्था की संपत्ति अरबों रुपए की है, जिस पर पिछले काफी समय से दिवंगत एसपी सिंह के नेतृत्व वाले गुट का कब्जा है। एसपी सिंह की मौत के बाद पिछले दो चुनावों से भारतीय जनता पार्टी लगातार इस संस्था पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है।
इस बार भाजपा की कई राज्य सरकारें इस संस्था पर कब्जा करने के लिए खुलकर चुनाव लड़ रही थीं। इस संस्था के सदस्य दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों से हैं। चारों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जिसके चलते इस बार भारतीय जनता पार्टी को इस संस्था पर कब्जा करने की पूरी उम्मीद थी। जिसके चलते उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी मुजफ्फरनगर आए थे और उन्होंने भाजपा के सभी जिम्मेदार नेताओं की बैठक लेकर इस संगठन के चुनाव को जीतने की रणनीति बनाई थी।
पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों सहित संवैधानिक पदों पर बैठे कई बड़े भाजपा नेता भी सीधे मतदाताओं को फोन कर वोट देने के लिए कह रहे थे। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भाजपा के कई मंत्री, सांसद और विधायक पूरी ताकत के साथ इस चुनाव में भाजपा पैनल को जिताने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रविवार को सिक्किम हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री कोहली की देखरेख में मतदान हुआ, जिसमें सोमवार को आधी रात तक मतगणना हुई, तो भाजपा का पूरा पैनल चुनाव हार गया। भाजपा के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रोहित चहल के पिता नरेश चौधरी भाजपा पैनल से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे, जबकि उनके साथ 21 अन्य सदस्यों का चुनाव होना था, जबकि मौजूदा काबिज पैनल से अध्यक्ष पद के लिए कैप्टन सिंह उम्मीदवार थे।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुजफ्फरनगर से पूर्व जिला महामंत्री हरीश अहलावत, शामली से हरेंद्र सिंह ताना, मेरठ से पूर्व पीसीएस शैलेंद्र सिंह भाजपा प्रत्याशी थे, जबकि दूसरे खेमे से मुजफ्फरनगर से विराज तोमर, शामली से योगेंद्र पाल सिंह, मेरठ से ब्रह्मपाल सिंह चुनाव लड़ रहे थे।
सोमवार देर रात तक मतगणना जारी रही, जिसमें विपक्षी खेमे के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी कप्तान सिंह 1827 वोट पाकर चुनाव जीत गए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी खेमे के नरेश चौधरी 1246 वोट पाकर चुनाव हार गए।
इनके अलावा जीतने वालों में अजय सारण 1694 वोट,अजीत सिंह प्रथम 1779 वोट, अजीत सिंह द्वितीय 1743 वोट, आनंद दहिया 1738, ब्रह्मदेव डबास 1764, ब्रह्म पाल सिंह 1707, ईशा जाखड़ 1788, इंद्रजीत सिंह 1790,करतार सिंह राणा 1731, ओम प्रकाश राठी 1715, राघवेंद्र मिर्धा 1717, राजपाल सिंह सोलंकी 1758, शिवराम तेवतिया 1633, एस एस सोलंकी 1706, डॉक्टर सुरेश नांदल 1704, पी एस तोमर 1682,उम्मेद सिंह गिल 1688, विराज तोमर 1633, वीरेंद्र चौधरी 1636 और योगेंद्र पाल सिंह वर्मा 1551 वोट पाकर विजयी घोषित हुए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के पैनल की ओर से अमरपाल सिंह को 1044, आनंद दहिया को 1115, आजाद सिंह जाटियान को 1025,भीम सिंह को 1011, विजेंद्र सिंह दलाल को 110, देवेंद्र सिंह सोलंकी को 1127, धर्मवीर सिंह को 1032,दुष्यंत लकड़ा को 1151,हरेंद्र सिंह को 1027, हरीश कुमार अहलावत को 1028, जयकरण पवार को 993, डॉक्टर जितेंद्र सिंह को 1029,महक सिंह को 1068, ओंकार सिंह नरवत को 987, रणवीर सिंह सिवाच को 1036, शैलेंद्र चौधरी पूर्व एडीएम को 1115, सुनील कुमार को 1079, विजय खत्री को 1037, योगेंद्र मलिक को 1058 और युद्ध वीर सिंह को 984 वोट मिली है।
पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों समेत भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच 7384 में से 2999 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।











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