नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में बुधवार को अमित शाह के भाषण के दौरान विपक्षी दलों के सदन से बाहर जाने (वॉकआउट) पर भाजपा हमलावर हो गई है। केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों ने इसे लोकतंत्र का अपमान बताते हुए राहुल गांधी की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
गिरिराज सिंह की चेतावनी: ‘बात नहीं सुनी तो बोलने भी नहीं देंगे’-
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ‘हिट-एंड-रन’ का तरीका अपनाते हैं—आरोप लगाओ और भाग जाओ। जब प्रधानमंत्री या गृह मंत्री जवाब देते हैं, तो वह सदन छोड़ देते हैं। उनमें कड़वा सच सुनने की ताकत नहीं है। यदि वह दूसरों को नहीं सुनेंगे, तो अगली बार हम भी उन्हें सदन में बोलने नहीं देंगे।”
डेमोग्राफी और घुसपैठ पर चिंता-
गृह मंत्री के बयान—’घुसपैठिए तय नहीं करेंगे कि देश का पीएम या सीएम कौन होगा’—का समर्थन करते हुए भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
वीरेंद्र कुमार: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बयान देश की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी और बिल्कुल सही है।
सामिक भट्टाचार्य: भाजपा सांसद ने पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में हो रहे जनसांख्यिकीय (Demographic) बदलाव पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि सीमावर्ती जिलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से आबादी का संतुलन बिगड़ गया है, जिसे कुछ पार्टियां तुष्टिकरण के लिए मतदाता सूची में शामिल कर रही हैं।
दिनेश शर्मा ने बताया ‘अभूतपूर्व’ भाषण-
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने अमित शाह के भाषण की सराहना करते हुए कहा कि गृह मंत्री ने कांग्रेस के प्रोपेगेंडा और झूठे दावों को तथ्यों के साथ ध्वस्त कर दिया है। उनके पास हंगामा करने और भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
आंतरिक सुरक्षा और राजनीति-
भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपने वोट बैंक के लिए देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ समझौता कर रहे हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों को मतदाता बनाना न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि लोकतंत्र को भी प्रभावित कर रहा है।











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