नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही चुनाव सुधारों पर चर्चा के साथ गरमा गई है। सदन में चुनावी प्रक्रियाओं और पारदर्शिता को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच भारी गतिरोध देखने को मिल रहा है।
विपक्ष की कमान दिग्गजों के हाथ-
कांग्रेस की ओर से चर्चा का मोर्चा अजय माकन, दिग्विजय सिंह और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे वरिष्ठ नेता संभाल रहे हैं। विपक्ष का मुख्य प्रहार ‘मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) पर केंद्रित है, जिसे वे चुनावी शुचिता के लिए चुनौती मान रहे हैं।
भाजपा के ‘दिग्गज’ देंगे जवाब-
विपक्ष के आरोपों को ध्वस्त करने के लिए भाजपा ने प्रखर वक्ताओं की टीम उतारी है। इसमें सुधांशु त्रिवेदी, उज्ज्वल निकम, हर्षवर्धन श्रृंगला और कविता पाटीदार शामिल हैं, जो सरकार की ओर से चुनाव सुधारों की आवश्यकता और एसआईआर की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देंगे।
अमित शाह का रुख और प्रधानमंत्री की सराहना-
इससे पहले बुधवार को लोकसभा में इसी मुद्दे पर बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया था। उनके भाषण की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की। अमित शाह ने स्पष्ट कहा था कि विपक्ष एसआईआर के मुद्दे पर देश को गुमराह कर रहा है।
सदन में एसआईआर पर चर्चा क्यों नहीं?
गृहमंत्री ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर (SIR) सीधे तौर पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जो एक स्वतंत्र संस्था है। सदन में इस पर चर्चा का कोई कानूनी आधार नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग सरकार के अधीन काम नहीं करता। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव सुधारों के बजाय केवल एक तरफा झूठ फैलाने और चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करने में जुटा है।
19 दिसंबर तक जारी रहेगा घमासान-
संसद का यह सत्र 19 दिसंबर तक चलना है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वक्फ संशोधन बिल और अन्य चुनावी मुद्दों पर भी सदन में भारी हंगामा देखने को मिल सकता है।











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