नई दिल्ली : चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो हर साल चैत्र माह में मनाया जाता है। इस दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है, जिसका इंतजार सभी को साल भर रहता है।
चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो हर साल चैत्र माह में मनाया जाता है। इस दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है, जिसका इंतजार सभी को साल भर रहता है। ये दिन सभी के जीवन में नई उम्मीद, खुशियां और तरक्की समेत लाभ से जुड़े कई अवसर लेकर आता है। इस वर्ष 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि शुरु हो चुके हैं, जिसका 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी के दिन है। इस दिन देवी की भव्य पूजा-अर्चना के साथ-साथ कन्या पूजन का विधान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने का अवसर है, इसलिए नौ दिनों तक सभी भक्तजन देवी की आराधना के साथ उपवास भी रखते हैं। इस दौरान नवरात्रि व्रत का पारण हमेशा अष्टमी व नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ किया जाता है। परंतु इस वर्ष अष्टमी-नवमी तिथि को लेकर भक्तों में असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए इस लेख के माध्यम से इसकी सही तिथियों के बारे में जानते हैं।
कब है अष्टमी ?
इस बार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 अप्रैल 2025 को रात 8 बजकर 12 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 5 अप्रैल 2025 को रात 7 बजकर 26 मिनट पर है। उदया तिथि के मुताबिक अष्टमी 5 अप्रैल 2025 को शनिवार के दिन मनाई जाएगी। ऐसे में अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करने वाले लोग इस दिन कन्याओं को भोजन करा सकते हैं।
कब है नवमी ?
इस साल 5 अप्रैल को नवमी तिथि रात 7 बजकर 26 मिनट पर शुरु हो रही है। इसका समापन 6 अप्रैल 2025 को रात 07 बजकर 22 मिनट पर है। ऐसे में 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी मनाई जाएगी। आप इस तिथि कन्या पूजन के साथ-साथ अपने व्रत का पारण भी कर सकते हैं।
अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 35 मिनट से 05:21 मिनट तक
प्रातः सन्ध्या – सुबह 04 बजकर 58 मिनट से 06:07 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक
नवमी कन्या पूजन मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 34 मिनट से 05:20 मिनट तक
प्रातः सन्ध्या – सुबह 04 बजकर 57 मिनट से 06:05 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बकर 58 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक
दुर्गा स्तुति मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थिता।।
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।”











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