मुजफ्फरनगर। जनपद के बुढ़ाना क्षेत्र में एक प्रस्तावित मेले को लेकर विवाद गहरा गया है। कांधला रोड स्थित एक विवादित 100 वर्षों से अधिक पुरानी मजार के पास मेले के आयोजन की अनुमति मिलने के बाद क्षेत्र के लोग लामबंद हो गए हैं। श्री जाहरवीर गोगाजी महामाई मंदिर समिति छड़ियान द्वारा अधिकारियों को गुमराह करके परमिशन लेने के गंभीर आरोप लगाए है। श्री जाहरवीर गोगाजी महामाई मंदिर समिति रजि. छडियान पर आरोप है कि उसने उच्चाधिकारियों को गुमराह कर इस मेला आयोजन की अनुमति प्राप्त की है और इसे अवैध रूप से आयोजित करने की तैयारी कर रही है। सोमवार को कुलबीर, लोकेश, गुलबीर, देवेंद्र सिंह आदि दर्जनों ग्रामीणों ने मीडिया सेंटर में एक प्रेस वार्ता की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मेला आयोजक समिति हर साल नई-नई जगहें चुनकर मेले लगाती है और जब उनकी अवैध गतिविधियों का पता जमीन मालिक चलता है तो मेला स्थल के मालिक अगले वर्ष मेला लगाने की अनुमति के लिए मना कर देते हैं। जहां पिछले वर्ष मेला लगा था वहां जमीन मालिक के मना करने पर संवेदनशील स्थल को चुना है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर मेले का आयोजन किया जा रहा है, वह पहले से ही विवादित है। क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए मेले की अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की है। इतना ही नहीं, क्षेत्रवासियों ने मीडिया सेंटर पहुंचकर भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समिति द्वारा पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर मेला आयोजित कर अवैध वसूली और कमाई की जाती रही है। एक स्थान पर आयोजित मेले के बाद जमीन मालिक ने अवैध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर अगले वर्ष अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद समिति हर वर्ष नई जगह चुनकर मेला लगाने लगी है। मौजूदा विवादित स्थल के बारे में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बताया गया कि यहां स्थित मजार को तोड़ने के मामले में खेत मालिकों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है, जिसके बाद हिन्दू संगठनों ने विरोध जताया था। प्रशासनिक हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ था, लेकिन अब इसी स्थान पर मेला आयोजित किए जाने से नई परिस्थितियां बन रही हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस तरह का आयोजन धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है और इससे अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मेले की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और सौहार्द बना रहे। यदि प्रशासन ने तत्काल अनुमति रद्द कर अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई तो विवाद की स्थिति बनी रहेगी।










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