नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर दिल्ली की अदालत द्वारा संज्ञान लेने से इनकार करने के बाद बुधवार को संसद भवन परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने इसे केंद्र सरकार की ‘बदले की राजनीति’ की हार बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी व इस्तीफे की मांग की।
विरोध प्रदर्शन की मुख्य बातें-
संसद के ‘मकर द्वार’ पर जमावड़ा: विपक्षी सांसद हाथों में ‘सत्यमेव जयते’ का बड़ा बैनर लेकर मकर द्वार पर एकत्रित हुए। सांसदों ने “प्रधानमंत्री माफी मांगो” और “प्रधानमंत्री इस्तीफा दो” के जोरदार नारे लगाए।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप: कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और सांसद शशि थरूर सहित अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों से नेशनल हेराल्ड के नाम पर झूठा प्रचार किया गया। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने साबित कर दिया है कि ED का इस्तेमाल केवल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है।
नेताओं के तीखे प्रहार-
केसी वेणुगोपाल: “अदालत के फैसले से सच्चाई की जीत हुई है। अब कांग्रेस कार्यकर्ता इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे।”
मणिकम टैगोर: “सरकार का झूठ बेनकाब हो गया है। ED के दुरुपयोग पर अदालत ने स्पष्ट जवाब दिया है।”
प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT): “ED पूरी तरह सरकार के एजेंडे पर काम कर रही है। नेशनल हेराल्ड मामले में कोई तथ्यात्मक आधार ही नहीं था।”
मामले की पृष्ठभूमि-
16 दिसंबर 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि बिना किसी मूल प्राथमिकी (FIR) के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं चलाया जा सकता। इस तकनीकी और कानूनी जीत को विपक्ष ने अपनी नैतिक जीत के रूप में पेश किया है।











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