लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को नई दिशा देने के लिए ‘मिशन शक्ति’ अभियान का पांचवां चरण आज से शुरू कर दिया है। राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। उनका स्पष्ट संदेश था — “जहाँ नारी का सम्मान होता है, वही समाज और राज्य विकास की ओर बढ़ता है।
‘मिशन शक्ति’ उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसकी शुरुआत 17 अक्टूबर 2020 को की गई थी। इसका उद्देश्य है महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके सम्मान को सामाजिक और संस्थागत रूप से मजबूत करना उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
यह अभियान केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, रोजगार और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी पहलें भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि हमने संकल्प लिया है कि हर बेटी स्कूल जाए, और सुरक्षित वापस आए। ये सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, ये समाज की मानसिकता का सवाल है। ‘मिशन शक्ति’ इसी मानसिकता को बदलने का प्रयास है।”
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक नाम अभियान का उद्देश्य बताते हुए कहा कि अभियान के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षा और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता मिलेगी
‘मिशन शक्ति’ उत्तर प्रदेश सरकार की एक ऐसी पहल बन चुकी है, जो महिला सशक्तिकरण को प्रशासनिक नीति से जोड़ती है। इसमें न सिर्फ सरकार, बल्कि समाज और शिक्षा संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
पांचवे चरण में अब अपेक्षा यह है कि इसके परिणाम निचले स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखें — चाहे वो ग्रामीण महिलाएं हों या शहरी छात्राएं।
क्या ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियान महिलाओं को सशक्त बनाने में कारगर हो सकते हैं? क्या ज़रूरत है और कड़े क़ानूनों या समाजिक जागरूकता की?










Discussion about this post