मुजफ्फरनगर। फ़िरोज़ाबाद, काकड़वाली के खेड़ी गाँव निवासी सौरभ उर्फ सोनू की प्रेम संबंधों के चलते हत्या कर दी गई। युवती के पिता, भाई और दोस्तों ने मिलकर इस हत्याकांड की योजना बनाई थी। मुख्य संदिग्ध दानिश को हत्या के लिए एक लाख रुपये दिए गए थे। मुठभेड़ में मुख्य संदिग्ध समेत पाँच संदिग्ध घायल हो गए। कुल सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने एक पिस्टल, चार रिवॉल्वर, पाँच मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। युवती के पिता ने इज्जत की खातिर हत्या की योजना बनाई थी।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में बताया कि सोमवार रात मलिकपुरा रजबहे की पुलिया पर मुठभेड़ में खेड़ी फिरोजाबाद निवासी मेहरबान उर्फ वीर सिंह और अंशुल घायल हो गए। उनसे दो तमंचे बरामद हुए। दोनों ने सौरभ की हत्या की वारदात स्वीकार की। दोनों पिमोडा की पुलिया पर खड़े साथियों को रुपये देने जा रहे थे। पुलिस के पहुंचने पर वहां मौजूद तीन आरोपियों ने फायरिंग की। मुठभेड़ में खेड़ी फिरोजाबाद निवासी दानिश, वंश व अलीशान घायल हो गए।
उनसे पिस्टल, दो तमंचे, पांच मोबाइल व बाइक बरामद हुई। उनसे पूछताछ के आधार पर गांव ककरौली से खोकनी जाने वाले रजबहे मार्ग पर पड़ने वाली पुलिया से खेड़ी फिरोजाबाद निवासी पवन व नई मंडी कोतवाली के गांव हरीपुरम कूकड़ा निवासी अक्षय को गिरफ्तार किया है।
एक लाख में दी सुपारी, तैयार हुआ दानिश : एसएसपी ने बताया कि झोला छाप मेहरबान सिंह उर्फ वीर सिंह ने एक नवंबर को अपने गांव के सौरभ उर्फ सोनू की हत्या बेटी से प्रेम-प्रसंग के चलते कराई थी। उसे जानकारी मिली कि दानिश को एक लाख रुपये की जरूरत है। उसे साजिश में शामिल कर बीस हजार रुपये एडवांस दे दिए। उसके बेटे वंश ने अपने दोस्त अलीशान एवं अंशुल को तैयार किया।
मोबाइल गिरवी रखकर दी मौत को दावत : दानिश ने अपना मोबाइल एक हजार रुपये में सौरभ के पास बहाने से 1300 रुपये में गिरवी रख दिया। पैसे वापस देने के बहाने सौरभ को बुलाया। दानिश उसे पार्टी के बहाने जौली मार्ग की तरफ ले गया। रास्ते में रुडकली भट्टे से पहले वंश, अलीशान व अंशुल के साथ खड़ा था। सौरभ ने खतरा भांपकर बाइक से उतरने का प्रयास किया तभी दानिश ने गर्दन पर चाकू से वार कर उसे घायल कर दिया।
आरोपी उसे खेत में ले गए। पिस्टल पकड़ने पर उसके हाथ में गोली मार दी गई। बाद में चाकू मार कर उसकी हत्या कर दी। अंशुल की बाइक से चारों आरोपी रास्ते में पड़ने वाले सीसीटीवी कैमरों से बचते हुए मुजफ्फरनगर भाग गए थे। अंशुल वापस पैसे लेने के लिए गांव आ गया था।











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