मुंबई: महाराष्ट्र में वक्फ संशोधन विधेयक के मुद्दे पर भले ही पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे शिवसेना यूबीटी के सांसदों को एकजुट रखने में सफल रहे थे लेकिन शिंदे की अगुवाई वाली शिंदे गुट से झटके पर झटके पर मिल रहे हैं। ताजा मामले में शिवेसना यूबीटी को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने जिस महिला नेत्री को चार दि पहले प्रवक्ता नियुक्त किया था। वह संजना घाडी शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गई हैं। बहुप्रतीक्षित बीएमसी चुनावों को देखते हुए हाल ही में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी ने मीडिया प्रवक्ताओं की नियुक्ति की थी। रविवार को संजना घाडी अपने पति संजय घाडी के साथ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो गई। इसे शिंदे गुट के ‘ऑपरेशन टाइगर’ का हिस्सा माना जा रहा है।
संजना घाडी की गिनती शिवसेना यूबीटी की मजबूत महिला प्रवक्ताओं में होती थी। संजना और उनके पति के साथ काफी कार्यकर्ताओं के शिवसेना से जुड़े पर उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि शिवसेना मालिकों की नहीं, कार्यकर्ताओं की पार्टी है। मैं भी आपकी तरह एक आम कार्यकर्ता हूं। संजना घाडी ने शिंदे गुट में जाने के बाद कहा कि उद्धव ठाकरे अपने आस-पास के लोगों की गलत सलाह के आधार पर गलत फैसले ले रहे हैं। विधानसभा चुनाव में गलत उम्मीदवारों को टिकट दिए गए, जिससे मेरे क्षेत्र के कई नेता और कार्यकर्ता निराश हैं। घाडी ने कहा कि जब प्रवक्ताओं की सूची जारी की गई थी, तो मेरा नाम पहले गायब था और बाद में जोड़ा गया। मैंने ऐसा क्या गलत किया कि मुझे बाहर रखा गया?
मुंबई में बीएमसी चुनाव अक्तूबर महीने में संभव हैं। मुंबई महानगरपालिका पर लंबे समय से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना का कब्जा रहा है लेकिन जिस तरह से नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। उसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। मुंबई में आखिरी बार बीएमसी चुनाव 2017 में हुए थे। इसके बाद चुनाव तब उद्धव की अगुवाई वाली शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं। विधानसभा चुनावों कारारी हार और शिंदे गुट के मजबूत होने के बाद उद्धव ठाकरे के सामने बीएमसी की सत्ता बचाने की चुनौती है। बीएमसी में चुनी हुई बॉडी का कार्यकाल खत्म होने से अभी प्रशासक कामकाज देख रहे हैं।











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