नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच पिछले दो हफ्तों में एक बड़ा तनाव देखा गया. लेकिन अब उनके बीच कूटनीति फिर शुरू होती दिख रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशास ने ईरान को बड़ा ऑफर दिया है. अमेरिका ने करीब 30 अरब डॉलर की मदद की पेशकश की है, जिसे वह सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के लिए प्रोग्राम बना सके. बड़ा सवाल है कि जिस ईरान पर कुछ दिन पहले अमेरिका बम बरसा रहा था, अचानक उस पर इतना मेहरबान क्यों हो गया? दरअसल इस ऑफर में एक बड़ी शर्त है कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से बंद करना होगा.
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत का सिलसिला अभी भी जारी है, जबकि इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुई सैन्य झड़पों के बाद एक अस्थायी युद्धविराम हो चुका है.
ईरान को करीब 20-30 अरब डॉलर का निवेश मिल सकता है, जिससे वह केवल सिविल न्यूक्लियर इस्तेमाल के लिए न्यूक्लियर प्रोग्राम बना सके.
ईरान को विदेशों में फंसे 6 अरब डॉलर तक की अपनी राशि इस्तेमाल करने की छूट दी जा सकती है.
कुछ प्रतिबंध हटाने को लेकर भी बातचीत हो सकती है.
पिछले हफ्ते वाइट हाउस में हुई एक गुप्त मीटिंग में अमेरिका के स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और खाड़ी देशों के नेताओं ने मिलकर इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कोशिश की. खास बात ये है कि ईरान के फोर्डो न्यूक्लियर साइट को हटाकर उसकी जगह सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना भी सामने आई है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान से अगले सप्ताह बातचीत शुरू हो सकती है. वहीं ईरान ने इस संभावना से पूरी तरह इनकार किया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने गुरुवार को साफ कर दिया कि अमेरिका से किसी भी नई परमाणु बातचीत को लेकर कोई सहमति नहीं बनी है. सरकारी टीवी चैनल पर दिए बयान में उन्होंने दो टूक कहा कि ‘अब अमेरिका के लिए अगली बातचीत पहले से भी ज्यादा मुश्किल होने वाली है. इंसानों की जान गई है, अब डील करना पहले जितना आसान नहीं होगा.’











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