मुजफ्फरनगर/ऋषिकेश। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की पुलिस के लिए सिरदर्द बना कुख्यात गैंगस्टर विनय त्यागी उर्फ टिंकू अब इस दुनिया में नहीं रहा। बुधवार को लक्सर (उत्तराखंड) में पेशी के दौरान हुए जानलेवा हमले के बाद ऋषिकेश एम्स में उसका इलाज चल रहा था, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।
अपराध का लंबा इतिहास: 1996 से शुरू हुआ खूनी खेल-
खाईखेड़ी गांव का रहने वाला विनय त्यागी अपराध की दुनिया का बड़ा नाम था। उस पर यूपी और उत्तराखंड के अलग-अलग थानों में 57 संगीन मुकदमे दर्ज थे। अपराध की राह उसने 1996 में पकड़ी, जब एक प्रेम-प्रसंग के विवाद में संदीप उर्फ टोनी और उसके बहनोई प्रदीप की हत्या में उसका नाम उछला। इसके बाद मुजफ्फरनगर के छपार, पुरकाजी और नई मंडी जैसे थानों में उसके खिलाफ मुकदमों की झड़ी लग गई। हाल ही में अक्टूबर 2025 में देहरादून पुलिस ने उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाया था।
सियासत में दखल और रसूख-
विनय त्यागी सिर्फ अपराधी नहीं था, बल्कि वह राजनीति के मैदान में भी अपनी पैठ बना चुका था।
चुनाव: उसने सहारनपुर की देवबंद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
पारिवारिक रसूख: अपनी ताकत के दम पर उसने अपनी पत्नी को दो बार पुरकाजी ब्लॉक का प्रमुख बनवाया।
प्रॉपर्टी विवाद: मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और देहरादून में विवादित जमीनों और प्रॉपर्टी के मामलों में उसका सीधा दखल रहता था।
हालिया गिरफ्तारी और जेल यात्रा-
इसी साल 14 सितंबर को देहरादून के नेहरू कॉलोनी में डॉ. प्रमोद त्यागी की गाड़ी से गहने और नकदी चोरी के मामले में पुलिस ने विनय त्यागी और भाकियू नेता हरिओम त्यागी को गिरफ्तार किया था। हरिओम को जमानत मिल गई थी, लेकिन आपराधिक इतिहास के कारण विनय रुड़की जेल में ही बंद था। 30 अक्टूबर 2025 को उसकी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई थी।
‘सिर तन से जुदा’ और अन्य विवाद-
विनय त्यागी पर सात साल पहले छपार थाने में दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रचने का भी आरोप था। इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 को होनी तय थी।
विनय त्यागी की मौत के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एक बड़े आपराधिक नेटवर्क के एक अध्याय का अंत हो गया है। पुलिस अब उस पर हमला करने वाले हमलावरों की तलाश में जुटी है।










Discussion about this post